चीन को सबक सिखाने के लिए भारत ने किया ऐसा काम, आर्मी हुई तैयार

Daily news network Posted: 2018-04-01 11:58:53 IST Updated: 2018-06-15 14:04:18 IST
  • डोकलाम में चीन के शातिर इरादों को नाकाम करने के लिए भारत ने अरूणाचल सेक्टर में सैनिकों की तैनाती बढ़ा दी है।

नई दिल्ली

डोकलाम में चीन के शातिर इरादों को नाकाम करने के लिए भारत ने अरूणाचल सेक्टर में सैनिकों की तैनाती बढ़ा दी है। दिबांग, दाऊ देलिया और लोहित घाटियों में सैनिकों की तैनाती और वहां के पर्वतीय क्षेत्रों में गश्त बढ़ा दी गई है। सैन्य अधिकारियों ने कहा है कि भारत रणनीतिक रूप से संवेदनशील तिब्बती क्षेत्र में सीमाओं पर चीनी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए फौज को और भी मजबूती दे रहा है। निगरानी के लिए हेलीकॉप्टर भी तैनात किया गया है।


 भारत तीनों घाटियों में सीमा पर चीन की बढ़ती आक्रामकता से निपटने के लिए अपनी रणनीति के तहत दुर्गम पवर्तीय क्षेत्रों पर अपनी पकड़ मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है जिनमें 17,000 फुट से ज्यादा ऊंचे और बर्फ से ढंके पर्वत शामिल हैं। सेना के अधिकारी ने कहा, 'डोकलाम के बाद हमने अपनी गतिविधियों को कई गुना बढ़ा दिया है। हम किसी चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।' अधिकारी ने कहा कि सेना अपनी लंबी रेंज पेट्रोल्स (एलआरपी) को बढ़ा रही है, जहां छोटे-छोटे समूहों में सैनिक 15-30 दिनों तक गश्ती के लिए जाते हैं। वास्तविक नियंत्रण रेखा भारत और चीन के बीच की असली सीमा है।

 


 

 रक्षामंत्री को बयान

 


हाल ही में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि अगर चीन सीमा पर किसी तरह की हिमाकत करता है तो भारत उसे मुंहतोड़ जवाब देगा। इसके बाद रक्षा मंत्री और भारतीय राजदूत के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए चीन ने कहा है कि डोकलाम उसका हिस्सा है और पिछले वर्ष हुए गतिरोध से भारत को सबक लेना चाहिए। दरअसल, राजदूत ने कहा था कि बीजिंग ने विवादित क्षेत्र में यथास्थिति बदलने की कोशिश की थी जिसके चलते दोनों देशों के बीच 73 तक गतिरोध चला।


निर्मला सीतारमण का बयान उन खबरों के बाद आया था, जिसमें दावा किया गया था कि चीनी सेना डोकलाम इलाके में निर्माण के जरिए भारतीय सेना को घेरने के फिराक में है। चीन में भारत के राजदूत बंबावले साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि चीनी फौज अपने सैनिकों के लिए बैरक बना सकती है। लेकिन वो जगह संवेदनशील इलाके से काफी पीछे है।

 


 रिपोर्ट से हुआ खुलासा


रिपोर्ट में ये जानकारी सामने आई थी कि चीनी सेना उस इलाके में तेजी से निर्माण कार्य में जुटी हुई है। बंबावले ने कहा कि पहली बात तो यथास्थिति बनाए रखने का सम्मान करना चाहिए। इसके अलावा अगर वो कोई निर्माण कार्य करते हैं तो उन्हें पहले भारत को बताना होगा कि वो क्या करने जा रहे हैं। अगर हम चीन के जवाब से सहमत नहीं होते हैं तो ये कह सकते हैं कि देखो आप यथास्थिति में बदलाव कर रहे हो और आप उसे ना करें तो बेहतर होगा।


 चीन ने इससे पहले भी की है घुसपैठ


चीन लगातार अरुणाचल के हिस्से में घुसपैठ करता रहा है। इससे पहले भी जनवरी में चीन की सड़क-बिल्डिंग निर्माण टीम पिछले हफ्ते अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सियांग जिले  में एक किलोमीटर तक घुस आई थी। लेकिन भारतीय सेना के विरोध के बाद चीन की सड़क निर्माण टीम वापस चली गई थी। सेना ने उनके सड़क खोदने के उपकरण समेत अन्य सामान को भी जब्त कर लिया था।

 

 


 सिक्किम सेक्टर के डोकलाम में बनार्इ थी सड़क


इससे पहले सिक्किम सेक्टर के डोकलाम में भारतीय सीमा पर पिछले साल चीनी सेना द्वारा सड़क के निर्माण के कारण दोनों देशों के सेनाओं के बीच 73 दिनों तक सैन्य गतिरोध चला था। आपको बता दें कि, चीन भारत के अरुणाचल प्रदेश को अपना बताता है और इसे दक्षिण तिब्बत कहता है। यह पूर्वोत्तर राज्य 3,448 किमी लंबी अचिन्हित भारत-चीन सीमा के पूर्वी सेक्टर में स्थित है।