असम में बड़े अपराध में आई कमी, अपहरण-गुंडागर्दी में मामलों बढ़ोतरी

Daily news network Posted: 2018-03-31 16:08:03 IST Updated: 2018-03-31 18:05:35 IST
असम में बड़े अपराध में आई कमी, अपहरण-गुंडागर्दी में मामलों बढ़ोतरी
  • असम पुलिस की ओर से तैयार एक दस्तावेज के अनुसार वित्त वर्ष 2016-2017 में बड़े अपराधों की संख्या में 3 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है ..

गुवाहाटी।

असम पुलिस की ओर से तैयार एक दस्तावेज के अनुसार वित्त वर्ष 2016-2017 में बड़े अपराधों की संख्या में 3 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है लेकिन जबरन वसूली, अपहरण और नकली नोटों की तस्करी के मामले और इस्तेमाल संबंधी मामलों में इस दौरान इजाफा हुआ है।

 


 असम पुलिस के दस्तावेज के अनुसार वित्त वर्ष 2015-2016 में जहां 12,628 मामलों की तुलना में इस साल बड़े अपराधों के कुल 12,229 मामले सामने आए यानी इनकी संख्या में 3.16 फीसदी की कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2014-2015 में यह संख्या 12,256 थी।

 


 आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार असम में हत्या के मामलों में पिछले तीन साल से लगातार गिरावट देखी गई है। साल 2014-2015, 2015-2016 और 2016-2017 में क्रमश 1427, 1263 और 1157 मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि राज्य में बलात्कार के मामलों में भी गिरावट देखी गई है। वर्ष 2014-2015, 2015-2016 और 2016-2017 में बलात्कार के 1998, 1801 और 1719 मामले सामने आए हैं।

 


 दस्तावेज के अनुसार पिछले वित्त वर्ष 2015-2016 में दंगों के मामले भी राज्य में कम होकर 1487 हो गए जबकि इससे पहले साल इनकी संख्या 2056 और वर्ष 2014-2015 में यह संख्या 2521 थी। इसके अलावा पिछले वित्त वर्ष 2015-2016 में डकैती के 156 मामले दर्ज किए गए हैं, इससे पहले के साल में 170 और 2014-2015 में 285 मामले दर्ज किए गए।

 


 वर्ष 2015-2016 में अपहरण के मामले 6040 और 2016-2017 में 6295 दर्ज किए गए हैं। वर्ष 2015-2016 में जबरन वसूली के 1344 और 2014-2015 में 1459 मामले दर्ज किए गए।


 नकली नोट के मामलों में 42फीसदी का इजाफा हुआ है। वर्ष 2015-2016 में ऐसे 50 मामलों की तुलना में पिछले साल 71 मामले दर्ज किए गए। वर्ष 2016-2017 में वाहन चोरी के 4277 और इससे पहले के वित्त वर्ष में 3971 मामले दर्ज किए हैं। इसका अर्थ हुआ कि वाहन चोरी के मामले तो बढ़े हैं लेकिन चोरी किए गए वाहन की बरामदी के मामलों में कमी आई है। वर्ष 2016-2017 में मात्र 523 और वर्ष 2015-2016 में 531 इकाइयां बरामद की गईं।