चुनाव के दौरान आईएलपी मुद्दा मार रहा उबाल, सरकार नहीं दे रही स्पष्ट जवाब

Daily news network Posted: 2019-04-24 11:23:19 IST Updated: 2019-04-24 11:23:19 IST
चुनाव के दौरान आईएलपी मुद्दा मार रहा उबाल, सरकार नहीं दे रही स्पष्ट जवाब
  • मेघालय में इनर लाइन परमिट (आईएलपी) का मुद्दा फिर गरमा गया है। राज्य सरकार से इस संदर्भ में उसकी स्थिति स्पष्ट करने की मांग उठी है।

शिलांग।

मेघालय में इनर लाइन परमिट (आईएलपी) का मुद्दा फिर गरमा गया है। राज्य सरकार से इस संदर्भ में उसकी स्थिति स्पष्ट करने की मांग उठी है। इसे लेकर कंफेडरेशन ऑफ मेघालय सोशल ऑर्गेनाइजेशन (सीएमएसए) ने मुख्यमंत्री कोनराड के संगमा पर निशाना साधा है। ऑर्गेनाइजेशन ने मांग की है कि तत्काल मेघालय डेमोक्रेटिक एलायंस (एमडीए) सरकार कैबिनेट की बैैठक कर आईएलपी पर तस्वीर साफ करे। राज्यवासी जानना चाहते हैं कि सरकार आईएलपी को लेकर अपनी क्या राय रखती है।

 

 

 

 

 गौरतलब है कि आज उपरोक्त ऑर्गेनाइजेशन के बैनर तले तमाम संगठनों ने शहर में काला दिवस मनाया एवं एक विरोधी रैली निकाली। मोटफार्म से पुलिस बाजार तक काले झंडे के साथ निकली इस रैली में वाहनों और अन्य स्थानों पर काले झंडे लगाए गए। आईएलपी को लेकर सरकार की वादाखिलाफी को लेकर संगठनों ने विरोध रैली निकाली। पत्रकारों से बात करते हुए हिन्यूट्रेप युवा परिषद (एचवाईसी) के नेता राकपूर सिनरेम ने कहा कि वे चाहते हैं कि मौजूदा एमडीए सरकार आईएलपी पर एक कैबिनेट बैठक कर इस संदर्भ में अपनी स्थिति स्पष्ट करे।

 

 

 

 

 

 

 उनका आरोप है कि मुख्यमंत्री का आईएलपी को लेकर कभी भी स्पष्ट बयान नहीं आया है। राज्य में आव्रजन के मुद्दे के उचित समाधान की दिशा कोई ठोस पहल के बजाए दूर से लग्गी से पानी पिलाने का काम हो रहा है। उन्होंने मीडिया के माध्यम से ध्यानाकर्षित किया कि इस संबंध में सीएम व डिप्टी सीएम प्रेस्टन टिनसोंग के बयान एक जैसे नहीं हैं। मुख्यमंत्री आईएलपी पर खुलकर कुछ कह बोल रहे। उनकी बातों से लग रहा है कि वे आईएलपी नहीं चाहते, जबकि उप मुख्यमंत्री ने कहा है कि सरकार राज्य में आईएलपी जैसे तंत्र के लिए काम कर रही है। ऐसे में मेघालय की जनता भ्रमित हो रही है। उन्होंने कहा कि एमडीए में तमाम घटक दल हैं। ऐसे में सभी पार्टियां भी अपनी स्थिति स्पष्ट करें। सिनरेम ने उन क्षेत्रीय दलों से भी सवाल किया, जो आईएलपी के बारे में अपने विचारों पर एमडीए सरकार में भागीदार हैं।

 

 

 

 

 ऑर्गेनाइजेशन ने धमकी दी है कि अगर राज्य सरकार आईएलपी लागू नहीं करती है तो वह अपने आंदोलन को और तेज कर देंगे। फेडरेशन ऑफ खासी जयंतिया एंड गारो पीपुल (एफकेजेजीपी) ने भी राज्य सरकार से आव्रजन को रोकने की दिशा में प्रवेश व निकास विंदु स्थापित करने के लिए कोई ठोस प्रक्रिया शुरू न करने के संकेत को देखते हुए आंदोलन करने की धमकी दी है।