युद्धस्तर पर चल रहा है वायुसेना के AN-32 विमान का बचाव कार्य, जानिए क्या हुआ उन 13 जवानों का

Daily news network Posted: 2019-06-12 19:55:44 IST Updated: 2019-06-12 20:14:00 IST
  • 9 दिन की मश्क्कत के बाद आखिरकार अरुणाचल के सियांग जिले में वायुसेना के लापता विमान AN-32 के मलबे को देखा लिया गया है।

ईटानगर

9 दिन की मश्क्कत के बाद आखिरकार अरुणाचल के सियांग जिले में वायुसेना के लापता विमान AN-32 के मलबे को देखा लिया गया है। मंगलवार दोपहर में इंडियन एयरफोर्स ने ट्वीट करके कहा है कि 'लापता एएन-32 विमान का मलबा लिपो से 16 किलोमीटर दूर दिखा है। एमआई-17 हेलिकॉप्टर को सर्च ऑपरेशन के दौरान करीब 12 हजार फीट ऊंचाई पर टाटो के उत्तर-पूर्व में यह मलबा दिखाई दिया है।'

 


 इस प्लेन की टोह लेने में ही एक हफ्ते से ज्यादा का वक्त लग गया है। हालांकि सेना के मुश्किले अभी खत्म नहीं हुई हैं क्योंकि जिस इलाके में इसके मलबे को देखा गया है वो घने जंगलों वाला इलाका है, ऐसे में ग्राउंड पार्टी को वहां तक पहुंचने में 1-2 दिन लग सकते हैं।

 



आपको बता दें कि इस विमान ने 3 जून को असम के एयरबेस से 12 बजकर 25 मिनट पर उड़ान भरी थी जिसमें 13 लोग सवार थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक ए एन-32 के पायलट आशीष तवर की पत्नी संध्या उस वक्त एयर ट्रैफिक कंट्रोल रूम में अपनी ड्यूटी कर रही थी और उन्होंने ही विमान को रडार से गायब होते देखा था जिसके बाद उन्होंने सबको इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एक बजे के करीब इस विमान का नियंत्रण कक्ष और अन्य एजेन्सियों से संपर्क टूट गया जिसके बाद इसको ढूंढने के लिए सर्च आपरेशन शुरू किया गया। आपको बता दें कि सुखोई-30, C 130 जे सुपर हर्क्युलिस, पी8 आई एयरक्राफ्ट, ड्रोन और सैटलाइट्स के जरिए विमान का पता लगाने की कोशिश की जा रही थी। इस अभियान में वायुसेना के अलावा नौसेना, सेना, खुफिया एजेंसियां, आईटीबीपी और पुलिस के जवान लगे हुए थे।

 

 

ये पहली बार नहीं है जब ईस्ट अरुणाचल इलाके में कोई विमान क्रैश हुआ हो, पहले भी कई बार इन घने जंगलों में ऐसे विमानों का मलबा मिला है जो द्वितीय विश्व युद्ध के दौर के हैं। अलग-अलग रिसर्च में एक बात निकलकर आई है कि इस एरिया के आसमान में बहुत ज्यादा टर्बुलेंस और 100 मील प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवा यहां की घाटियों के संपर्क में आने पर ऐसी स्थितियां बनाती हैं कि यहां उड़ान बहुत ज्यादा मुश्किल हो जाती है। वहीं, यहां की घाटियां और घने जंगलों में घिरे हुए किसी विमान के मलबे को तलाश करना ऐसा मिशन बन जाता है जिसके पूरा होने में कई बार सालों लग जाते हैं।