...तो तेजपुर एेसे बना मोहब्बत का शहर

Daily news network Posted: 2018-04-21 12:28:24 IST Updated: 2018-04-21 13:17:35 IST
...तो तेजपुर एेसे बना मोहब्बत का शहर
  • पूर्वोत्तर भारत की नायाब सुंदरता को देख कर एेसा लगता है मानों प्रकृति ने इसे अपने हाथों से सजाया हो। पूर्वोत्तर के राज्यों में प्रकृति की मेहरबानी साफ देखने को मिलती है।

तेजपुर।

पूर्वोत्तर भारत की नायाब सुंदरता को देख कर एेसा लगता है, मानो प्रकृति ने इसे अपने हाथों से सजाया हो। पूर्वोत्तर के राज्यों में प्रकृति की मेहरबानी साफ देखने को मिलती है, लेकिन आज हम आपको बताने जा रहे हैं असम के शहर तेजपुर के बारे में, जो कभी 'मोहब्बत का शहर' के नाम से प्रसिद्ध था।

 

 


कल-कल बहती और अपनी मौज में लहराती विशाल ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तरी किनारे पर बसे इस शहर को असम की सांस्कृतिक राजधानी भी कहा जाता है। तेजपुर राजधानी गुवाहाटी से करीब 180 किलोमीटर दूर स्थिति है। मंदिरों, घाटों और हजारों साल पुरानी स्थापत्य कला के अवशेषों के लिए मशहूर यह शहर असम का पांचवां सबसे बड़ा शहर है। तेजपुर असम का वह छोर है, जिसके आगे से अरुणाचल प्रदेश शुरु हो जाता है।

 

 

भौगोलिक बसावट के कारण सामरिक दृष्टि से भी खास

 

अरुणाचल प्रदेश के पहाड़ों की तलहटी पर बसा यह शहर अपनी भौगोलिक बसावट के कारण सामरिक दृष्टि से भी खासी अहमियत रखता है। इतना ही नहीं, यह शहर 'सिटी ऑफ रोमांस' के नाम से भी मशहूर है यानी मोहब्बत का शहर। इतने विशेषणों से सजा उत्तर-पूर्व का यह शहर बहुआयामी है। यहां आकर आप खुद पाएंगे कि यह देश अनोखा है और इसका हर शहर अनूठेपन से भरा हुआ।

 



मोहब्बत का शहर कैसे बना ये छोटा सा तेजपुर


तेजपुर शहर को शोणितपुर भी कहा जाता है। मोहब्बत का शहर पीछे एक मिथकीय कहानी प्रचलित है। संस्कृत शब्द 'शोणित' का मतलब है लाल रंग। असम की लोकथाओं में मान्यता है कि तेजपुर भगवान शिव के अनन्य भक्त बाणासुर की राजधानी हुआ करती थी। बाणासुर की पुत्री उषा बेइंतहां खूबसूरत थी और उसे लोगों की नजर से बचाने के लिए बाणासुर ने उसे अग्निगढ़ नामक अपने किले में कैद कर लिया था। उषा सपने में एक पुरुष को देखा करती थी, जिससे वह मन ही मन प्यार कर बैठी। यह बात उसने अपनी सहेली चित्रलेखा को बताई।

 

 


चित्रलेखा ने उषा के कहे मुताबिक उस पुरुष का एक चित्र बनाया और उसे खोज लाई। वह पुरुष अनिरुद्ध था। उषा और अनिरुद्ध ने गंधर्व विवाह कर लिया। चित्रलेखा ने अग्निगढ़ के किले में उषा और अनिरुद्ध को मिला तो दिया, लेकिन जब यह बात बाणासुर को पता चली तो उसने अनिरुद्ध को बंदी बना लिया। अनिरुद्ध को छुड़ाने के लिए कृष्ण ने तेजपुर पर धावा बोल दिया।

 

 


बाणासुर ने भगवान शिव से मदद की गुहार लगाई और फिर हुआ दो भगवानों के बीच एक महासंग्राम, जिससे तेजपुर की धरती रक्त से रंग गई। महासंग्राम के बाद लहूलुहान हुई यह धरती तभी से तेजपुर के नाम से मशहूर हो गई। उषा और अनिरुद्ध के अलौकिक प्यार की याद में इसे 'मोहब्बत का शहर' भी कहा जाने लगा।