इस कारणों से ढह गया पूर्वोत्तर में कांग्रेस आखिरी किला

Daily news network Posted: 2018-12-14 13:33:29 IST Updated: 2018-12-14 13:33:29 IST
इस कारणों से ढह गया पूर्वोत्तर में कांग्रेस आखिरी किला
  • मिजोरम विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार हुर्इ तो वहीं क्षेत्रिय पार्टी एमएनएफ को बहुमत मिला।

आइजोल।

मिजोरम विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार हुर्इ तो वहीं क्षेत्रिय पार्टी एमएनएफ को बहुमत मिला। पूर्वोत्तर में मिजोरम एकमात्र एेसा राज्य था जहां दस सालों से कांग्रेस सत्ता में थी लेकिन राज्य में कांग्रेस की हार के साथ ही पूर्वोत्तर कांग्रेस मुक्त हो गया है।  2013 में 34 सीटें हासिल करने वाली कांग्रेस सिर्फ 5 सीटों पर सिमट गई। राज्य में 5 बार मुख्यमंत्री रह चुके ललथनहवला को लगातार तीसरी जीत की उम्मीद थी लेकिन एमएनएफ ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। दो सीटों से चुनाव लड़े ललथनहवला अपने गृह क्षेत्र सरछिप और चम्फाई दक्षिण दोनों जगहों से हार गए। तो आइए जानते हैं कि दस सालों से राज्य की सत्ता में रही कांग्रेस के हार का क्या करण हैं...


 

 कांग्रेस के अंदर फूट

 राज्य में पार्टी को आंतरिक कहल का सामना करना पडा जिस कारण से विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का हार का सामना करना पड़ा। चुनाव से पहले कांग्रेस के पांच नेताअों ने पार्टी का दामन छोड़ दिया आैर अन्य राजनीतिक दलों में शामिल हो गए। ललथनहवला के करीबी नेता आैर राज्य गृह मंत्री लालजिर्लियाना ने चुनाव से पहले इस्तीफा देकर एमएनएफ का दामन थाम लिया। ललजिर्लियाना एमएनएफ के टिकट से तावी विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में थे आैर उन्होंने भाजपा अध्यक्ष जेवी लूना को हराकर जीत दर्ज की। इसके बाद राज्य में विधानसभा अध्यक्ष हिफेर्इ ने भी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए।नेताओं के इस्तीफे के कारण पार्टी के प्रति लोगों का विश्वास हिला।


 कांग्रेस की नीतियां

 ललथनहवाला की कुछ नीतियाें ने आम लोगों पर उल्टा प्रभाव डाला। मुख्यमंत्री की नर्इ भूमि उपयोग नीति (एनएलयूपी) और नई आर्थिक विकास नीति (एनईडीपी) पूरी तरह नाकाम रही। र्इसार्इ बहुल इस राज्य में 1995 से शराब पर बैन था लेकिन कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद 2015 में शराब बैन को हटा दिया। कांग्रेस के इस फैसले का एमएनएफ आैर जेडपीएम दोनों से विरोध किया था। साथ ही राज्य में बढ़ रहे नशे की लत के कारण जनता नाखुश थी।

 

 


 एंटी इन्कंबेंसी फैक्टर

 मुख्यमंत्री ललथनहवला के नेतृत्व में कांग्रेस लगातार 10 सालों से सरकार में थी। जिसके कारण राज्य में सत्ता विरोधी लहर चली। राज्य में कांग्रेस सरकार की आधारभूत संरचनाओं के विकास की स्थिति से लोग संतुष्ट नहीं थे। साथ भूमि सुधार जैसे मांगों पर सरकार घिर गई थी। हालांकि नतीजे आने से पहले मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया था कि राज्य में दोबारा से कांग्रेस ही सता में आएगी। लेकिन 40 सीटों में से कांग्रेस महज पांच सीटें ही मिली। बता दें कि विधानसभा चुनाव में निवर्तमान मुख्यमंत्री दो सीटों से चुनाव लड़ रहे थे आैर उन्हें दोनों सीटों से हार का सामना करना पड़ा।

 

 

 पूर्वोत्तर से कांग्रेस का हुआ है सफाया

 पिछले दो सालों में असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर के बाद अब मिजोरम में भी कांग्रेस ने सत्ता गंवाई है। गौरतलब है कि मेघालय में सबसे ज्यादा 20 सीटें लाने के बाद भी कांग्रेस सरकार नहीं बना पाई थी। 2 सीटें हासिल करने वाली बीजेपी ने नेशनल पीपल्स पार्टी (एनपीपी) (20 सीटें) और अन्य पार्टियों के साथ मिलकर सरकार बना ली थी।