असम में बढ़ी महिलाओं के अपहरण की वारदातें, मोदी सरकार से जांच के लिए कहा

Daily news network Posted: 2019-02-11 11:42:50 IST Updated: 2019-02-11 11:42:50 IST
असम में बढ़ी महिलाओं के अपहरण की वारदातें, मोदी सरकार से जांच के लिए कहा

नई दिल्ली।

असम में महिलाओं के अपहरण की उच्च दर से चिंतित संसदीय पैनल ने केन्द्र को मामलों की जांच के लिए कहा है। केन्द्र व राज्य सरकार से अगवा किए गए पीडि़तों का पता लगाने और उन्हें बरामद करने के लिए अभियान शुरू करने के लिए भी कहा है।

 

 


 गृह मंत्रालय से अटैच संसद की स्थायी समिति ने संसद में पेश अपनी रिपोर्ट में इस तरह के अपहरण व मानव तस्करी के बीच संबंध की मौजूदगी का जिक्र करते हुए केन्द्र से इंटर स्टेट जांच करने को कहा है। साथ ही इस तरह के पीडि़तों को बरामद करने के लिए की गई कार्रवाई पर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने को भी कहा है। संसदीय पैनल ने आशंका जताई है कि हिंसक अपराधों व असम में अपहरण की वारदातों में बढ़ोतरी के पीछे पूर्व उग्रवादियों के सही सैटलमेंट व पुनर्विस्थापन नहीं होना है। हो सकता है ये लोग फिरौती के लिए इस तरह के अपराधों में शामिल हो।

 

 


 इसलिए पैनल ने सिफारिश की है कि केन्द्र राज्य सरकार से समन्वय स्थापित करें और उन उग्रवादियों की गतिविधियों पर करीब से नजर रखें, जिन्होंने पिछले दशक के दौरान सरेंडर किया था। साथ ही उन पर भी करीब से नजर रखें जो फिलहाल सरकार के साथ वार्ता कर रहे हैं। असम में उग्रवाद से संबंधित हिंसा के ट्रेंड में कमी के बावजूद अपहरण और फिरौती की वारदातें जारी है। संसदीय पैनल ने इस तथ्य पर चिंता जताई कि 2016 के दौरान या उससे पहले असम में बड़ी संख्या में महिलाओं का अपहरण हुआ, उन्हें अभी तक बरामद नहीं किया गया।

 

 


 इसके अलावा चिंता की सबसे बड़ी बात यह है कि इनमें से 81 फीसदी महिलाएं हैं। गृह मंत्रालय ने अपनी एक्शन टेकन रिपोर्ट में कहा है कि पिछले दशक में सरेंड करने वाले उग्रवादियों व उन उग्रवादियों की गतिविधियों पर भी नजर रखने के लिए तंत्र स्थापित किया गया है जो फिलहाल सरकार से वार्ता कर रहे हैं। केन्द्र सरकार ने समर्पण करने वाले उग्रवादियों के समूहों के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं जिसमें अभियान निलंबित करने की बात शाििमल है। कई जमीनी नियम कायदे हैं जिनका सरेंडर करने वाले उग्रवादियों को पालन करना होगा। उग्रवादी समूहों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए एक संयुक्त निगरानी समूह भी है।