'मदरसों में नहीं पढ़ाई जाएगी अरबी भाषा'

Daily news network Posted: 2018-04-07 17:22:52 IST Updated: 2018-04-07 17:22:52 IST
'मदरसों में नहीं पढ़ाई जाएगी अरबी भाषा'
  • असम के शिक्षा मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के बयान ने राज्य में विवाद को हवा दे दी है। शिक्षा मंत्री के द्वारा शुक्रवार को दिए गए एक बयान में कहा कि मदरसों में अरबी की जगह असमिया पढ़ार्इ जानी चाहिए

गुवाहाटी।

असम के शिक्षा मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के बयान ने राज्य में विवाद को हवा दे दी है। शिक्षा मंत्री के द्वारा शुक्रवार को दिए गए एक बयान में कहा कि मदरसों में अरबी की जगह असमिया पढ़ार्इ जानी चाहिए। जिस पर कड़ा विरोध हाे रहा है। उन्होंने कहा असमिया अरब देशों में नहीं पढ़ार्इ जाती है तो फिर असम में अरबी पढ़ाने की कोर्इ जरूरत नहीं है।

  

 

 

मंत्री द्वारा दिए गए इस बयान पर कांग्रेस के पूर्व वन मंत्री रकीबुल हुसैन ने पूछा कि असमिया काे तो इंग्लैंड में भी नहीं पढ़ार्इ जाती है तो असम में अंग्रेजी क्यों पढ़ार्इ जाती है। इस पर सरमा ने कहा कि मुझे समझ नहीं आता है कि जब भी अरबी के बारे में कुछ कहा जाता है तो वह आप लोगों को परेशान क्यों करता है? इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार लोगों के पैसे को अरबी पढ़ा कर बर्बाद कर रही है। हिमंत ने कहा कि करदाता बड़ी मेहनत से ये पैसा कमाते हैं।

 


 

 इसके अलावा मंत्री ने कहा कि सरकार मदरसों आैर संस्कृत जैसे स्कूलों में गणित, अंग्रेजी आैर विज्ञान जैसे बिषयों का आधुनिकरण करना चाहती है। बता दें कि अध्यक्ष के द्वारा आयोजित की गर्इ शिक्षा पर दो दिवसीय की चर्चा में मंत्री ने ये बातें कही। इस पर एआर्इयूडीएफ के विधायक अमीनुल इस्लाम ने सदन से बाहर पत्रकारों से कहा कि हमारे राज्य से बड़ी संख्या में युवा रोजगार की तलाश में पश्चिम एशिया जाते हैं, जहां अरबी का ज्ञान उनके लिए वहां फायदेमंद होता है।

  

 


इस्लाम ने राज्य में शिक्षा प्रणाली की समस्याआें को हल के लिए समाधान की पेशकश करने की बजाय शिक्षा मंत्री पर राजनीतिक बयान देने का आरोप लगाया है। इस्लाम के अलावा हुसैन ने भी मंत्री के बयान को निराशाजनक बताया है। शिक्षा पर विशेष चर्चा के दौरान सरमा ने कहा कि बहुत से विधायक शिक्षकों के मुद्दों पर बात करते हैं लेकिन स्टूडेंट्स के अधिकार की बात कोर्इ नहीं करता है। साथ ही उन्होंने कहा कि गुणवत्ता वालें शिक्षक स्टूडेंट्स का मौलिक अधिकार है।

 


सरमा ने कहा कि बहुत से विधायक शिक्षकों की भर्ती के लिए नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन और शिक्षा का अधिकार अधिनियम के द्वारा निर्धारित मापदंडों में छूट का समर्थन करते हैं। हालांकि मेरी प्रतिक्रिया स्टूडेंट्स पर केंद्रित मुद्दे पर होगी न कि शिक्षकाें पर ।

 

 


 

 

 उन्हाेंने कहा कि अभी हाल ही में बड़ी संख्या में शिक्षकों की नियमित भर्ती की गर्इ है। जिनकी भर्ती पर संदेह है आैर उसे वैरिफार्इ करना होगा। जबकि इन शिक्षकों ने मगध आैर विनायक विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों से पीएचडी किया हुआ है। मंत्री ने कहा कि विधायकों के कहने पर शिक्षकों की ट्रांसफर कर दिया जाता है जबकि स्टूडेंट्स को उनके ट्रांसफर के कारण परेशानी का सामना करना पड़ता है।  

 

 

 


 सरमा ने कहा कि सरकार यूनिफार्म की एक जोड़ी खरीदने के लिए  800 रुपये सीधे अभिभावकों के खाते में ट्रांसफर कर रही है। इस पर अध्यक्ष हितेंद्र नाथ गोस्वामी ने विशेष चर्चा के दाैरान उठाए गए मुददो पर शिक्षा विभाग से रिपार्ट मांगी है। उन्होंने कहा है कि  90 दिनों के अंदर रिपाेर्ट को लिखित आैर मौखिक रूप में प्रस्तुत करने का कहा है।