शहीदों का अपमान करने वाले इस मुस्लिम विधायक को भारत की बेटी ने दिया करारा जवाब

Daily news network Posted: 2019-02-18 18:49:57 IST Updated: 2019-02-18 18:49:57 IST
शहीदों का अपमान करने वाले इस मुस्लिम विधायक को भारत की बेटी ने दिया करारा जवाब
  • ढिंग एक्सप्रेस के नाम से मशहूर असम की धावक हिमा दास ने जम्मू कश्मीर के पुलवामा जिले में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकी हमले को लेकर किए एआईयूडीएफ के विधायक अमिनुल इस्लाम के बयान की आलोचना की है।

ढिंग एक्सप्रेस के नाम से मशहूर असम की धावक हिमा दास ने जम्मू कश्मीर के पुलवामा जिले में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकी हमले को लेकर किए एआईयूडीएफ के विधायक अमिनुल इस्लाम के बयान की आलोचना की है।

 

 


 बता दें कि असम के ढिंग से एआईयूडीएफ के विधायक अमिनुल इस्लाम ने फेसबुक पर ऐसी विवादित पोस्ट डाली है जो न केवल आपत्तिजनक है बल्कि निंदनीय है। अपने पोस्ट में विधायक इस्लाम ने सवाल किया है कि भारत में हर लोकसभा चुनाव से पहले ही कश्मीर में आतंकी हमले क्यों होते हैं।

 

 


 हिमा ने कहा, 'एक विधायक होने के नाते उन्हें इस तरह के बयान पोस्ट करने से बचना चाहिए था। यह सुनकर मैं बेहद दुखी हूं। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।' दास ने नागांव के कंधुलिमारी गांव में एक गेस्ट हाउस के उद्घाटन के मौके पर मीडिया को संबोधित करते हुए कहा।

 


 आपको बता दें कि कश्मीर के पुलवामा जिले के अवंतीपुरा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आत्मघाती हमले में 42 जवान शहीद हो गए थे। विधायक के इस पोस्ट के बाद लोगों ने विधायक की निंदा करते हुए उन्होंने इस तरह को नॉनसेंस पोस्ट करने से पहले 1000 बार सोचने को कहा। आपको बता दें कि आतंकी हमले में असम का एक जवान भी शहीद हुआ है। उनका नाम मानेश्वर बासुमातारी है, जो बक्सा जिले के कोलबारी गांव के रहने वाले थे।

 


 बासुमातारी सीआरपीएफ की 98 बटालियन में बतौर हेड कांस्टेबल तैनात थे। उनकी बेटी ने आतंकी हमले के जिम्मेदार लोगों को मुंहतोड़ जवाब देने की मांग की है। चाहे इसके लिए सीमा पर सर्जिकल स्ट्राइक ही क्यों न करनी पड़े। बासुमातारी अपने पीछे पत्नी सनमाति बासुमातारी व दो बच्चों धनंजय और दिदमासवारी को छोड़ गए हैं। शहीद जवान की बेटी ने कहा, हम न्याय चाहते हैं। मेरे पिता और अन्य जवानों को मारने वालों को दंड मिलना चाहिए। मेरे पिता ने 25 साल देश की सेवा की है। वे 1994 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे। ड्यूटी के दौरान उन्होंने अपने प्राण न्योछावर किए। उनका बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार को मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए और हमारे जवानों की शहादत का बदला लेना चाहिए।