birthday special: आयरन लेडी इरोम शर्मिला, बेहद दिलचस्प है इनके संघर्ष की कहानी

Daily news network Posted: 2018-03-14 13:58:12 IST Updated: 2018-03-14 16:58:23 IST
birthday special: आयरन लेडी इरोम शर्मिला, बेहद दिलचस्प है इनके संघर्ष की कहानी
  • इरोम शर्मिला, ये नाम सामने आते ही सरकार के खिलाफ अनशन पर बैठी एक महिला की तस्वीर खुद ब खुद दिमाग में छा जाती है।

मणिपुर।

इरोम शर्मिला, ये नाम सामने आते ही सरकार के खिलाफ अनशन पर बैठी एक महिला की तस्वीर खुद ब खुद दिमाग में छा जाती है। 16 साल तक भूख हड़ताल कर आम्र्ड फोर्स स्पेशल पॉवर एक्ट (आफ्सपा) को हटाने की जंग लडऩे वालीं इरोम शर्मिला आज अपना 46वां जन्म दिन मना रही हैं। इरोम शर्मिला ने 2016 में अनशन तोड़ा, राजनीति में उतरी और शादी भी की। आप उनके जन्मदिन पर हम आपको शर्मिला के जीवन से जुड़ी कुछ खात बातों से रूबरू करवा रहे हैं।

 

 

 


इंफाल के कोंगपाल इलाके में हुआ जन्म

 इरोम शर्मिला का पूरा नाम इरोम चानू शर्मिला है। इरोम का जन्म 14 मार्च 1972 को मणिपुर की राजधानी इंफाल के कोंगपाल इलाके में हुआ। 2 नवम्बर 2000 का दिन इरोम की जिंदगी में सबसे बड़ा बदलाव लाया। इस दिन मणिपुर की राजधानी इंफाल के मालोम में असम राइफल्स के जवानों के हाथों 10 बेगुनाह लोग मारे गए थे। इस घटना ने इरोम की आत्मा को इतना झकझोर दिया कि उन्होंने जवानों के खिलाफ  हड़ताल का फैसला ले लिया।

 

 


आफ्सपा के खिलाफ छेड़ी थी खुली जंग

 इरोम सुर्खियों में पहली बार 4 नवंबर 2000 को आईं जब उन्होंने आफ्सपा के खिलाफ  खुली जंग छेड़ते हुए भूख हड़ताल शुरू कर दी। इरोम की इस भूख हड़ताल का मकसद राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की तरह शांतिपूर्ण तरीके से सरकार का विरोध और पूर्वोत्तर राज्यों में लागू आफ्सपा को हटाना था। 4 नवम्बर 2000 से लेकर 9 अगस्त 2016 इरोम करीब 16 सालों तक भूख हड़ताल पर रहीं। बीते 16 वर्षों में उनकी हालत कई बार नाज़ुक हुई और उनके जीवन में भी कई उतार-चढ़ाव आए।

 

 

 


भूख हड़ताल था शर्मिला का हथियार

 इरोम को उम्मीद थी कि वह महात्मा गांधी के नक्शे कदम पर चल 1958 से अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मणिपुर, असम, नागालैंड, मिजोरम, त्रिपुरा और 1990 से जम्मू-कश्मीर में लागू आफ्सपा हटवाने में कामयाब होंगी। पूर्वोत्तर राज्यों के विभिन्न हिस्सों में लागू इस कानून के तहत सुरक्षा बलों को कानून तोडऩे वालों या नियमों का उल्लंघन करने वालों को गोली मारने या बिना वारंट के गिरफ्तार करने का अधिकार है। शर्मिला इसके खिलाफ  इम्फाल के जस्ट पीस फाउंडेशन नामक गैर सरकारी संगठन से जुड़कर भूख हड़ताल करती रहीं।

 

 

 


सरकार ने कई बार किया गिरफ्तार

 भूख हड़ताल के चलते सरकार ने शर्मिला को आत्महत्या के प्रयास में गिरफ्तार कर लिया था। क्योंकि यह गिरफ्तारी एक साल से अधिक नहीं हो सकती, इसलिए हर साल उन्हें रिहा करते ही दोबारा गिरफ्तार कर लिया जाता था। इरोम की नाक में नली लगाई गई, जिसके जरिए उन्हें खाना दिया जाता था और इसके लिए पोरोपट के सरकारी अस्पताल के एक कमरे को अस्थायी जेल बना दिया गया था। उनके नाम पर अबतक दो रिकॉर्ड दर्ज हो चुके हैं। पहला सबसे लंबी भूख हड़ताल करने और दूसरा सबसे ज्यादा बार जेल से रिहा होने का रिकॉर्ड दर्ज है। 2014 में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर उन्हें एमएसएन ने वूमन आइकन ऑफ इंडिया का खिताब दिया था।  इरोम शर्मिला ने 1000 शब्दों में एक लंबी बर्थ शीर्षक से एक कविता लिखी थी। यह कविता आइरन इरोम टू जर्नी- व्हेयर द एबनार्मल इज नार्मल नामक एक किताब में छपी थी। इस कविता में उन्होंने अपने लंबे संघर्ष के बारे में बताया है।