एनआरसी में आया एक और मोड़, पढ़िए पूरी खबर

Daily news network Posted: 2019-09-11 15:04:16 IST Updated: 2019-09-11 15:04:50 IST
एनआरसी में आया एक और मोड़, पढ़िए पूरी खबर
  • राष्ट्रीय नागरिक पंजी(एनआरसी) की अंतिम सूची के पुनर्सत्यापन का कनूनन अधिकार राज्य सरकार को पहले से ही मिला हुआ है और सरकार की ओर से इस संदर्भ में उच्च न्यायालय में अलग से आवेदन करने की जरूरत नहीं है।

गुवाहाटी।

राष्ट्रीय नागरिक पंजी(एनआरसी) की अंतिम सूची के पुनर्सत्यापन का कनूनन अधिकार राज्य सरकार को पहले से ही मिला हुआ है और सरकार की ओर से इस संदर्भ में उच्च न्यायालय में अलग से आवेदन करने की जरूरत नहीं है। प्रव्रजन विरोधी मंच के समन्वयक उपमन्यु हजारिका ने गुवाहाटी प्रेस क्लब में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में इस बात का खुलासा किया। हजारिका ने कहा कि एनआरसी मसौदे के मामले में 4 नंबर धारा में उपायुक्त को पुनर्सत्यापन का अधिकार दिया गया है।


 उन्होंने कहा कि पिछले साल 28 अगस्त को उच्चतम न्यायालय ने एनआरसी के  10 प्रतिशत पुनर्सत्यापन के आदेश दिए थे, जबकि इस धारा के अनुसार राज्य सरकार के पास हमेशा से ही पुनर्सत्यापन करने का अधिकार थे। उन्होनों कहा कि एनआरसी के मामले में 2003 अधिनियम की 10 नंबर धारा पंजीयन प्रबंधन को यह अधिकार देती है कि जिन लोगों ने गलत अथवा फर्जी दस्तावेजों की मदद से एनआरसी की अंतिम सूची में अपने नाम दर्ज कराए हैं, उनके नाम को काट सकता है।



हजारिका ने कहा कि उक्त 10 नंबर धारा के तहत एनआरसी की अंतिम सूची में जो विसंगतियां रह गई हैं अथवा फर्जी तरीके से बहुत से विदेशियों के नाम शामिल हो गए हैं, उचित जांच कर और दस्तावेज जुटाकर उक्त धारा के तहत पुनर्सत्यापन किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि उक्त बिंदुओं पर ध्यान आकर्षित कराने के लिए प्रव्रजन विरोधी मंच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल को अलग-अलग ज्ञापन देने जा रहा है।


 उन्होंने कहा कि एनआरसी यहां के मूल निवासियों को अल्पसंख्यक होने से नहीं बचा सकती, लिहाजा केंद्र व राज्य सरकार दोनों को मिलकर अविलंब ऐसे कानूनी प्रबंध करना चाहिए, जिसके द्वारा वर्ष 1951 से असम में निवास करने वालों की अगली पीढ़ी के लिए भूमि नौकरी और रोजगार का संरक्षण किया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि एनआरसी में समय रहते यदि सुधार नहीं किया गया तो यह असम आंदोलन के असफलता का दस्तावेज बनकर रह जाएगा।