गोपीनाथ बोरदोलुई के कारण ही टुकड़े-टुकड़े होने बचा था असम, पढ़ें पूरी कहानी

Daily news network Posted: 2019-06-06 14:57:25 IST Updated: 2019-06-06 14:57:25 IST
गोपीनाथ बोरदोलुई के कारण ही टुकड़े-टुकड़े होने बचा था असम, पढ़ें पूरी कहानी
  • गोपीनाथ बोरदोलुई असम के पूर्व लोकप्रिय नेता, स्वतंत्रता सेनानी और पूर्व मुख्यमंत्री रहे हैं

गुवाहाटी

आज यानी 6 जून को असम के लोकप्रिय नेता, स्वतंत्रता सेनानी और पूर्व मुख्यमंत्री गोपीनाथ बोरदोलुई (Gopinath Bordoloi) की जयंति है। गोपीनाथ भारत के स्वतंत्रता सेनानी होने के साथ ही असम के प्रथम मुख्यमंत्री थे। उनकी दूर​दर्शिता के कारण ही भारत स्वतंत्रता के समय असम टुकड़े—टुकड़े होने से बचा था। गांधीवादी विचारधारा के समर्थक गोपीनाथ के नाम पर ही लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अन्तरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनाया गया है जो पूर्वोत्तर राज्यों के लिए प्रवेशद्वार होने के साथ ही  सबसे बड़ा हवाई अड्डा भी है।

 

असम के एकीकरण में दिया सहयोग

भारत की स्वतंत्रता के बाद गोपीनाथ ने सरदार वल्लभ भाई पटेल के साथ मिलकर कार्य किया और असम को भारत में विलय करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी। उनके कारण असम चीन और पूर्वी पाकिस्तान यानी आज के बांग्लादेश से बचकर भारत का अभिन्न अंग बन पाया था। असम को हड़पने के चीन और पाकिस्तान ने उस समय काफी चालें चली थी, लेकिन उनके योगदान के कारण असम बच सका।

 

 

गोपीनाथ बोरदोलोई का जीवन परिचय

गोपीनाथ बोरदोलोई का जन्म 6 जून 1890 को रहा नामक स्थान पर हुआ था। उन्होंने 1911 में स्नातक की डिग्री ली और 1914 में कलकत्ता विश्वविद्यालय से एएम ऐ किया। इसके बाद 3 साल तक कानून की पढ़ाई की और फिर गुवाहाटी आकर सोनाराम हाई स्कूल में प्रिसिपल की अस्थाई नौकरी कर ली। 19 सितंबर, 1938 से 17 नवंबर 1939 तक वो असम के मुख्यमंत्री रहे। उनको मरणोपरांत 1999 में भारत रत्न से भी नवाजा गया।