अब सोना और चांदी खरीदना हुआ और भी महंगा

Daily news network Posted: 2018-04-10 13:47:23 IST Updated: 2018-04-10 14:11:56 IST
अब सोना और चांदी खरीदना हुआ और भी महंगा
  • पिछले सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिवस पर तेजी के साथ बंद हुआ दिल्ली का सर्राफा कारोबार में सोमवार को भी तेजी रही।

पिछले सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिवस पर तेजी के साथ बंद हुआ दिल्ली का सर्राफा कारोबार में सोमवार को भी तेजी रही। सोमवार को दिनभर के कारोबार के बाद शाम को दिल्ली सर्राफा बाजार तेजी के साथ बंद हुआ। सोने की कीमतें 31 रुपये की बढ़त के साथ 31500 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गई हैं। इसी तरह चांदी की कीमतों में भी बढ़त दर्ज की गई है। इंडस्ट्रियल यूनिट्स और सिक्का निर्माताओं की ओर से तेज उठान के चलते चांदी 50 रुपये बढ़कर 39250 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई है। व्यापारियों का मानना है कि घरेलू बाजार में स्थानीय ज्वैलर्स की ओर से लगातार खरीदारी के चलते सोने की कीमतों में बढ़त देखने को मिली है।

 

 


अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट

अंतरराष्ट्रीय बाजार में लंदन का सोना हाजिर 5.80 डॉलर फिसलकर 1,327.90 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। जून का अमरीकी सोना वायदा भी 4.7 डॉलर की गिरावट में 1,331.40 डॉलर प्रति औंस बोला गया। चांदी में 0.01 डॉलर की नरमी रही और यह 16.34 डॉलर प्रति औंस बोली गई। कारोबारियों के मुताबिक दुनिया की अन्य प्रमुख मुद्राओं की तुलना में डॉलर के मजबूत होने से वैश्विक स्तर पर पीली धातु पर दबाव बढ़ा है। वैश्विक स्तर पर सिंगापुर में सोना 0.34 फीसद की कमजोरी के साथ 1328.80 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर और चांदी 0.03 फीसद की कमजोरी के साथ 16.35 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर आ गई है।

 



दिल्ली में बढ़ीं कीमतें

देश की राजधानी दिल्ली में 99.9 फीसदी और 99.5 फीसदी शुद्धता वाला सोना 30 रुपये की बढ़त के साथ 31500 रुपये और 31350 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया है। शनिवार के सत्र में सोने की कीमतों में 120 रुपये की तेजी दर्ज की गई थी। गिन्नी के भाव, 24800 रुपये प्रति आठ ग्राम के स्तर पर बरकरार रहे हैं। इसी तरह चांदी तैयार 50 रुपये की बढ़त के साथ 39250 रुपये प्रति किलोग्राम और साप्ताहिक आधारित डिलीवरी 90 रुपये की बढ़त के साथ 38325 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई है। चांदी के सिक्कों के भाव 74000 रुपये लिवाल और 75000 रुपये बिकवाल प्रति सैंकड़ा के स्तर पर स्थिर रहे हैं।