भारत के इस राज्य हर साल तबाही मचाती है बाढ़, हो चुकी है एक हजार से ज्यादा लोगों की मौत

Daily news network Posted: 2019-06-26 18:04:26 IST Updated: 2019-06-26 18:54:48 IST
  • भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में मानसून ने जबरदस्त दस्तक दी है जिसकी वजह से वहां पर भारी बारिश हो रही है। राज्य के कई हिस्सों में मूसलाधार बारिश हो रही है।

भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में मानसून ने जबरदस्त दस्तक दी है जिसकी वजह से वहां पर भारी बारिश हो रही है। राज्य के कई हिस्सों में मूसलाधार बारिश हो रही है। इस वजह से वहां पर जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है। वहीं, देश के कई अन्य इलाकों में अभी तक बारिश का इंतजार किया जा रहा है।


बात करते हैं असम, जहां बाढ़ से तबाही कोई नई बात नहीं है। हर साल आने वाली बाढ़ में सैंकड़ों लोग मारे जाते हैं और करोड़ों रुपए का नुकसान होता है। आइए नजर डालते है कुछ आकड़ों पर......


असम में 2001 से लेकर अब तक एक या दो बार नहीं बल्कि 40 बार बाढ़ आ चुकी है जो अपने साथ न जाने कितनी जिंदगियों को बहा ले गई। पिछली बाढ़ ने असम में 159 लोगों को अपना शिकार बनाया था। असम के राजस्व व आपदा प्रबंधन मंत्री पल्लब लोचन दास ने विधानसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में बताया था कि 2001 से लेकर अब तक राज्य में बाढ़ से 14 अन्य लोग लापता हो गए तो वहीं 1071 लोग अपनी जान से हाथ धो चुके हैं। आकंड़ो पर नजर डाले तो सबसे ज्यादा मौतें मोरीगांव जिले में हुई। यहां 2001 से लेकर अब तक 199 लोग मारे गए हैं। अब ये लोग तटबंधों पर रहने को मजबूर हैं। बात करें रोजी-रोटी की तो बाढ़ के पानी ने 4,03,05 बीघा जमीन को नष्ट कर दिया है जो कि अपने आप में बड़ा नंबर है।

 


 केंद्र और राज्य में पिछले कई सालों में कई सरकारें आई और गई। उन्होंने करोड़ों रुपए का निवेश किया। अब समय आ गया है कि उनकी लंबी अवधि की योजनाओं का आकलन किया जाए और यह देखा जाए कि जिन समाधानों को अमल में लाया भी गया या नहीं, उन्होंने समस्या को दूर करने में सफलता पाई भी या नहीं।

 


 असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने 2016 को एक ‘फ्लड रिपोर्ट’ जारी की थी जो ये कहती थी कि सबसे ज्यादा प्रभावित असम के जिले: मोरीगांव, जोरहट, धुबरी, लखीमपुर, गोलाघाट, बारपेटा, धेमाजी, सोनितपुर, गोलपारा, बोंगाईगांव और दरांग।


 बाढ़ की वजह से होने वाले मिट्टी के कटाव की भारी कीमत असम को चुकानी पड़ी है। 1954 से अब तक 4.2 हैक्टेयर जमीन कटाव की वजह से इस राज्य ने खो दी है। बीते बरसों में, दक्षिण असम क्षेत्र में सबसे ज्यादा कटाव हुआ है। नलबाड़ी में माकालुमा (80 हजार हैक्टेयर), माजुली द्वीप (42,000 हैक्टेयर), गोलपाड़ा इलाका (40,000 हैक्टेयर) और मोरीगांव (15,000 हैक्टेयर) सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।

 


 आइए अब नजर डालते हैं बाढ़ के कारणों पर...

 मौजूदा बाढ़ की वजह, अरुणाचल प्रदेश, भूटान और ऊपरी असम में हुई तेज बारिश है। इससे ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों में पानी का स्तर बढ़ गया और वह खतरे के निशान से ऊपर चले गए हैं। अतिरिक्त पानी ने कई जगहों पर तटबंध तोड़ दिए और पूरे रास्ते में बाढ़ के हालात बने, खासकर निचले असम में।

 


 बाढ़ और मिट्टी के कटाव के मुख्य कारणः

 

 प्राकृतिक कारणः

 1- क्षेत्र की जियोलॉजी और जियोमॉर्फोलॉजी

 2- घाटी की फिजियोग्राफिक स्थिति

 3- सिस्मिक गतिविधि

 4- अति वर्षा

 

 मानव-निर्मित कारणः

 1- मनुष्यों के बनाए तटबंधों की वजह से पानी की निकासी में होने वाली दिक्कतें

 2- नदी के इलाकों में मनुष्यों का अतिक्रमण