Exit Poll: इस राज्य में हो सकता है BJP को बड़ा नुकसान, कांग्रेस को फायदा

Daily news network Posted: 2019-05-19 19:44:04 IST Updated: 2019-05-20 16:37:56 IST
  • लोकसभा चुनाव के लिए सातों चरणों की वोटिंग पूरी हो चुकी है। अब सबकी निगाहें 23 मई को होने वाली मतगणना पर टिकी हुई हैं। असम में मुख्य मुकाबला कांग्रेस और एआईडीयूएफ (AIDUF) गठबंधन बनाम बीजेपी गठबंधन के बीच है।

नई दिल्ली/गुवाहाटी।

लोकसभा चुनाव के लिए सातों चरणों की वोटिंग पूरी हो चुकी है। अब सबकी निगाहें 23 मई को होने वाली मतगणना पर टिकी हुई हैं। असम में मुख्य मुकाबला कांग्रेस और एआईडीयूएफ (AIDUF) गठबंधन बनाम बीजेपी गठबंधन के बीच है। टाइम्स नाउ और वीएमआर (VMR) के एग्जिट पोल्स के मुताबिक, 2019 में असम में बीजेपी को एक सीट का नुकसान हो सकता है। 14 सीटों के लिए हुए मुकाबले में इस बार कांग्रेस पिछली बार (2014) से एक सीट की बढ़त के साथ 7 सीटों पर पहुंच सकती है।

 


 गौरतलब है कि वर्ष 2014 में इंडियन नैशनल कांग्रेस और एआईडीयूएफ गठबंधन ने 14 सीटों में से 6 सीटें हासिल की थीं जबकि बीजेपी के खाते में 7 सीटें गई थीं। 2014 में अन्य के खाते में भी 1 सीट रही थी। एग्जिट पोल्स के मुताबिक, इस बार कांग्रेस को 7 सीटें मिल सकती हैं जबकि बीजेपी 1 सीट के नुकसान के साथ 6 सीटें हासिल कर सकती है। इस बार भी अन्य के खाते में 1 सीट रहने की उम्मीद है।

 


 अब बात की जाए वोट शेयर की तो वर्ष 2014 में आईएनसी और एआईडीयूएफ गठबंधन को 44.4 फीसदी वोट मिले थे जबकि बीजेपी के पास 40.3 पर्सेंट वोट की हिस्सेदारी थी। अन्य के खाते में 15.3 फीसदी वोट गए थे। एग्जिट पोल्स के अनुसार, 2019 में कांग्रेस को 0.8 फीसदी वोट शेयर का नुकसान हो सकता है। ऐसे में कांग्रेस को 43.6 फीसदी वोट मिलने की उम्मीद है जबकि बीजेपी को 0.85 फीसदी वोट का फायदा होता नजर आ रहा है। इसके मुताबिक, बीजेपी 2014 के 40.3 फीसदी वोटों की तुलना में इस बार 2019 में 41.15 पर्सेंट वोट हासिल करेगी। अन्य को 0.05 फीसदी वोटों के नुकसान के साथ 15.25 फीसदी मत मिलने की संभावना जताई जा रही है।



असम की कुल 14 लोकसभा सीटों के लिए शुरुआती 3 चरणों में वोट डाले गए। यहां 11 अप्रैल को पहले चरण में 5, 18 अप्रैल को दूसरे चरण में 5 और 23 अप्रैल को तीसरे चरण में 3 सीटों पर वोट डाले गए। असम में मुख्य मुकाबला बीजेपी, कांग्रेस और बदरुद्दीन अजमल की ऑल इंडिया यूनाटेड डेमोक्रैटिक फ्रंट (AIUDF) के बीच है। यहां एनआरसी और अवैध बांग्लादेशी शरणार्थियों का मुद्दा काफी अहम रहा। सिटिजनशिप अमेंडमेंट बिल को लेकर पूर्वोत्तर में बीजेपी के सहयोगियों में भी नाराजगी देखी गई।