7 गोलियां खाकर भी उग्रवादियों को धूल चटाने वाला जवान सिस्टम के आगे हो गया लाचार

Daily news network Posted: 2018-04-20 11:29:12 IST Updated: 2018-04-20 11:53:17 IST
7 गोलियां खाकर भी उग्रवादियों को धूल चटाने वाला जवान सिस्टम के आगे हो गया लाचार
  • कभी सिक्किम में उग्रवादियों से लड़ते वक्त सात गोलियां खाने के बाद भी उन्हें धूल चलाने वाले रामस्वरूप आज सिस्टम के आगे लाचार हो गए हैं।

गंगटोक।

 ये कहानी सीआरपीएफ के रिटायर्ड लांस नायक रामस्वरूप की है। कभी सिक्किम में उग्रवादियों से लड़ते वक्त सात गोलियां खाने के बाद भी उन्हें धूल चलाने वाले रामस्वरूप आज सिस्टम के आगे लाचार हो गए हैं। दरअसल रामस्वरूप अपने हथियार के लाइसेंस को रिन्यू करवाना चाहते हैं, लेकिन सरकारी दफ्तर के चक्कर काटते-काटते वे हार गए। आखिर सिस्टम से परेशान रामस्वरूप डीएम से मिले और उनके सामने लाइसेंस निरस्त करने की अर्जी दे डाली। हालांकि जब डीएम ने उन्हें हथियार लाइसेंस वारिसों के नाम पर स्थानांतरण करने को कहा तो उन्होंने साफ मना कर दिया।



 

 

रामस्वरूप मूल रूप से फरीदपुर के तैरुआ गांव से हैं। फिलहाल संजयनगर बाईपास की सैनिक कॉलोनी में शिव विहार में रह रहे हैं। 1969 में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में कांस्टेबल बने। तैनाती पूर्वोत्तर के राज्यों में मिली। सिक्किम के गंगटोक में तैनाती के दौरान नक्सलियों और उग्रवादियों से मुठभेड़ में अपनी जांबाजी यूनिट की कानबाई पर हुआ हमला नाकाम किया था। सीआरपीएफ  की गंगटोक स्थित 109 बटालियन के कंपनी कमांडर ने बहादुरी के इनाम के तौर पर निजी शस्त्र लाइसेंस की संस्तुति दी। सिक्किम सरकार से सिंगल बैरल बंदूक का लाइसेंस मिला था।



 

 

रामस्वरूप बताते हैं 1999 में मिजोरम में तैनात था। लोकसभा के चुनाव चल रहे थे। तीन अक्टूबर 1999 को मिजोरम-सिक्किम रोड पर उग्रवादियों ने कैंप पर हमला कर दिया। उग्रवादियों के टारगेट पर आ गया। बाएं पैर में उग्रवादियों ने एके-47 से गोलियां उतार दीं। बेहोश होने पर मरणासन्न हालत में साथियों ने सेंट्रल अस्पताल पहुंचाया। ऑपरेशन में सात गोलियां जांघ से निकलीं। जब खड़ा हुआ तो पता चला कि पैर सात इंच छोटा हो गया। मेडिकल कंडीशन के आधार पर 2003 में सीआरपीएफ  ने रिटायर कर दिया।




 

रामस्वरूप ने बताया कि रिटायरमेंट के बाद शस्त्र बरेली ट्रांसफर कराया। रिन्यूअल के वक्त कागज पूरे करने और फाइल आगे बढ़ाने के लिए रिश्वत मांगी जाती है। अब मेडिकल कंडीशन बताकर रिन्यूअल नहीं किया गया। रिटायर आदमी कहां से पैसे लाए। 70 साल उम्र हो गई है। अब कंधे पर सिस्टम और शस्त्र का बोझ नहीं उठाया जाता।