Election: जानिए 2014 से कितना अलग रहा 2019 का लोकसभा चुनाव

Daily news network Posted: 2019-05-20 14:25:43 IST Updated: 2019-05-20 20:41:02 IST
  • लोकतंत्र का महापर्व लोकसभा चुनाव संपन्न हो चुका है। इस बार सत्रहवीं लोकसभा की 543 सीटों में से 542 सीटों के लिए वोटिंग संपन्न हो चुकी है। इस चुनाव में पहले चरण का मतदान 11 अप्रैल से 19 मई के बीच सात चरणों में हुए।

नई दिल्ली/गुवाहाटी।

लोकतंत्र का महापर्व लोकसभा चुनाव संपन्न हो चुका है। इस बार सत्रहवीं लोकसभा की 543 सीटों में से 542 सीटों के लिए वोटिंग संपन्न हो चुकी है। इस चुनाव में पहले चरण का मतदान 11 अप्रैल से 19 मई के बीच सात चरणों में हुए। अब राजनीतिक दलों, नेताओं के साथ-साथ पूरे देश की निगाहें गुरुवार को घोषित होने वाले नतीजों पर टिकी हैं। उस दिन पता चलेगा कि 7, लोक कल्याण मार्ग एक बार फिर मोदी का स्वागत करेगा या फिर किसी नए प्रधानमंत्री का। आइए नजर डालते हैं कैसा रहा इस बार का लोकसभा चुनाव और 2014 के मुकाबले कितना अलग या कितना समान रहा इस बार का चुनाव।

 


 सातवें चरण में 63.98 प्रतिशत वोटिंग हुई। इस बार जैसे-जैसे चुनाव अगले पड़ाव पर बढ़ता गया, आने वाले हर फेज में पिछले की तुलना में कम वोटिंग हुई। 2014 में ऐसा ही ट्रेंड था जब पहले 2 चरणों के दौरान वोटिंग पर्सेंट 60-70 प्रतिशत रहा जो सातवां चरण आते-आते 66.40 प्रतिशत पर आ गया। वैसे 2014 के पोलिंग ट्रेंड से 2019 की तुलना पूरी तरह ठीक नहीं होगी। तब 9 चरणों में चुनाव हुए थे और इस बार 7 चरणों में हुए। हालांकि, इस बार के पहले 6 चरण में वोटर टर्नआउट 2014 के पहले 6 चरणों की तरह ही रहा।

 


 अगर ओवरऑल टर्नआउट की 2014 से तुलना करें तो इस बार करीब 2 प्रतिशत की कमी देखी गई। 2014 में ओवरऑल टर्नआउट 66.3 प्रतिशत था तो इस बार 64.2 प्रतिशत रहा है। वैसे यह आंकड़ा सातवें चरण का आखिरी डेटा आने के बाद थोड़ा सा बढ़ भी सकता है।

 


 वोटिंग में महिलाएं रहीं आगे

 इस बार के चुनाव में महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। वोटिंग में महिलाएं पुरुषों से सिर्फ 0.4 प्रतिशत कम रहीं। अगर पिछली बार की बात करें तो 2014 में महिलाओं का वोटिंग पर्सेंट पुरुषों के मुकाबले 1.4 प्रतिशत कम था। जाहिर है कि महिला और पुरुष वोटर टर्नआउट में गैप तकरीबन भर चुका है। 1957 में दोनों में सबसे ज्यादा 23.93 प्रतिशत का गैप था जो इस बार सिर्फ 0.4 प्रतिशत है।

 


 तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल, मणिपुर, मेघालय, गोवा, पुदुचेरी, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम में तो महिला वोटरों की तादादा पुरुषों से ज्यादा है। पुरुषों से ज्यादा महिला वोटरों वाले इन 9 राज्यों (और केंद्रशासित प्रदेशों) में लोकसभा की 85 सीटें हैं।

 



आडवाणी, जोशी, लालू नहीं दिखे प्रचार में

 इस बार चुनाव प्रचार में ऐसे तमाम दिग्गज नदारद दिखे जो 2014 में स्टार कैंपेनर थे। इनमें से कुछ तो स्वाभाविक कारणों से (जयललिता और करुणानिधि का क्रमशः 2016 और 2018 में निधन हो गया, लालू प्रसाद यादव जेल में सजा काट रहे हैं।) तो कुछ को रिटायरमेंट के लिए मजबूर होना पड़ा (लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी ओवर एज होने की वजह से)। वहीं कुछ ने मर्जी से खुद को इससे दूर रखा (सुषमा स्वराज, खराब स्वास्थ्य की वजह से) तो कुछ ने उत्तराधिकारी को जिम्मेदारी सौंप दी (सोनिया गांधी, वह पांचवीं बार राय बरेली से उम्मीदवार तो हैं लेकिन चुनाव प्रचार में बहुत ज्यादा हिस्सा नहीं लिया, बेटे राहुल और बेटी प्रियंका वाड्रा को यह जिम्मेदारी सौंपी)।

 


 2014 जैसा हाइटेक नहीं था इस बार का चुनाव

 इस बार 2014 की तरह नरेंद्र मोदी का हाइटेक प्रचार अभियान नहीं दिखा। पिछली बार मोदी ने होलोग्राम रैलियां की थी। इस बार मोदी की रैलियां भी कम हुईं। पिछली बार सितंबर 2013 से लेकर मई 2014 तक 8 महीनों में नरेंद्र मोदी ने कुल 437 रैलियों को संबोधित किया। इस बार उन्होंने कुल 144 रैलियां और रोड शो किए। रैलियों के मामले में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मोदी के ठीक पीछे रहे। उन्होंने इस बार 125 रैलियों को संबोधित किया जबकि 2014 में सिर्फ 46 रैलियां की थीं।