Election 2019: सिक्किम में 1979 से ही रहा है क्षेत्रीय दलों का दबदबा

Daily news network Posted: 2019-04-03 15:10:11 IST Updated: 2019-04-03 15:55:53 IST
Election 2019: सिक्किम में 1979 से ही रहा है क्षेत्रीय दलों का दबदबा
  • पूर्वोत्तर राज्य सिक्किम के भारत संघ में 1975 में विलय के बाद से ही यहां क्षेत्रीय दलों का दबदबा रहा है।

गंगटोक।

पूर्वोत्तर राज्य सिक्किम के भारत संघ में 1975 में विलय के बाद से ही यहां क्षेत्रीय दलों का दबदबा रहा है। नेताओं की मानें तो राष्ट्रीय दलों के प्रति स्थानीय लोगों में डर, अविश्वास के कारण 1979 से अभी तक राज्य में किसी भी विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय दलों को कोई मौका नहीं मिला है।


 क्षेत्रीय दल एसडीएफ लंबे समय से सिक्किम में सत्ता में है क्योंकि उसने अपनी विचारधारा और शासन को सिक्किम के लोगों के हितों के साथ जोड़ रखा है। अक्टूबर 1979 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में नर बहादुर भंडारी के नेतृत्व वाली सिक्किम जनता परिषद (एसजेपी) सामान्य बहुमत से जीतकर सत्ता में आई थी।

 


  

 पार्टी ने 31 सीटों पर चुनाव लड़ा था जिनमें से उसे 16 सीट मिली थीं। दो अन्य क्षेत्रीय दलों सिक्किम कांग्रेस (आर) और सिक्किम प्रजातंत्र कांग्रेस (एसपीसी) को क्रमश: 11 और चार सीटें मिली थीं। हालांकि एसजेपी का बाद में कांग्रेस में विलय हो गया, लेकिन भंडारी ने पार्टी का साथ छोड़ दिया। उन्होंने नए क्षेत्रीय दल सिक्किम संग्राम परिषद (एसएसपी) का गठन किया।

 


 वर्ष 1985 में हुए विधानसभा चुनाव में एसएसपी का प्रदर्शन शानदार रहा। पार्टी ने 32 में से 30 सीटें जीतीं। भंडारी की पार्टी 1989 के विधानसभा चुनावों में भी विजयी रही। वह सभी 32 सीटें जीतकर तीसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री बने। पर, 1990 के दशक में भंडारी की लोकप्रियता कम होने लगी। उनके करीबी पवन कुमार चामलिंग बागी हो गए और उन्होंने अपनी पार्टी एसडीएफ का गठन किया।

 


 क्षेत्रीय दलों पर राज्य की जनता का विश्वास लगातार बना रहा है। 1994 में चामलिंग की पार्टी एसडीएफ 19 सीटों पर विजयी रही। वहीं, भंडारी की पार्टी 10 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर रही। वर्ष 1999 विधानसभा चुनाव में भी क्षेत्रीय दलों का दबदबा रहा। चामलिंग की पार्टी 24 सीटों के साथ सत्ता में आई जबकि एसएसपी मुख्य विपक्षी दल रही। फिर 2004 में चामलिंग की एसडीएफ ने सभी 32 सीटों पर जीत हासिल कर विपक्ष को खत्म कर दिया। उनकी पार्टी 2014 में पांचवीं बार जीतकर सत्ता में आई। उसे 22 सीटें मिली थीं।