Manipur के रास्ते दिल्ली में सप्लाई होती थी अफगान और पाकिस्तान की 'हेरोइन'

Daily news network Posted: 2018-02-21 14:39:49 IST Updated: 2018-11-02 11:51:50 IST
Manipur  के रास्ते दिल्ली में सप्लाई होती थी अफगान और पाकिस्तान की 'हेरोइन'
  • अफगानिस्तान और पाकिस्तान के ड्रग तस्करों का गिरोह भारत में ड्रग कैसे खपा रहे हैं, इसको लेकर बड़ा खुलासा हुआ है।

इंफाल

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के ड्रग तस्करों का गिरोह भारत में ड्रग कैसे खपा रहे हैं, इसको लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। ये तस्कर मणिपुर के विद्रोह प्रभावित इलाकों में ड्रग्स लाते हैं और यहां से वह दिल्ली और उत्तर भारत में सप्लाई करते हैं। स्पेशल सेल ने हाल ही में तीन तस्करों से पांच किलोग्राम हेरोइन बरामद की थी। इस हेरोइन की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में करीब 20 करोड़ रुपये है।

 

 


 स्पेशल सेल के डीजीपी संजीव यादव ने बताया कि जो हेरोइन बरामद की गई, उसका लिंक मणिपुर और पश्चिम बंगाल से था। इन इलाकों में अफीम की गैर-कानूनी खेती होती है। स्पेशल सेल ने इन तस्करों के पास से कई मोबाइल हैंडसेट और सिम कार्ड्स बरामद किए जो तस्करी में इस्तेमाल किए जाते थे। गिरफ्तार तस्कर रामनाथ (26), वीरेंद्र पाल सिंह (29) और परवेज खान (64) उत्तर प्रदेश के बदायूं के रहने वाले हैं।

 

 


 परवेज ने पूछताछ में बताया कि उसके संबंध मणिपुर के कई तस्करों के हैं जो उन्हें बहुत ही सस्ते दामों में हेरोइन देते थे। वहां से हेरोइन लाकर वे लोग दिल्ली में ड्रग्स बेचने वालों को दोगुने दामों में बेच देते थे।

 


 रामनाथ ने बताया कि वह पश्चिम बंगाल के मालदा, फरक्का और मणिपुर के इंफाल में जाता था। वहां उसकी मुलाकात खान और निजाम से होती थी। खान और निजाम सेना के दो विद्रोही कमांडरों की सहायता से उन लोगों को हेरोइन दिलवाता था। पुलिस एक अन्य तस्कर आलोक की भी तलाश कर रही है।

 

 


 इस तस्करी की घटना की जानकारी स्पेशल सेल को सूत्रों से तीन महीने पहले पता चली कि बोलेरो (UP-25BN 2108) से कुछ लोग ड्रग्स की तस्करी कर रहे हैं। इसके बाद पश्चिम बंगाल, मणिपुर और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जगहों पर सूत्रों को ऐक्टिव किया गया। इस नंबर की कार को दिल्ली के बाहरी इलाके बरवाला और प्रह्लादपुर में देखा गया।

 

 


 सूत्रों ने बताया कि बोलेरो से चार किलो हेरोइन सप्लाई होने जा रही है। पुलिस ने तस्करों को पकड़ने के लिए जाल बिछाया तो रामनाथ और वीरेंद्र पाल ने भागने का प्रयास किया। पुलिस ने उनका पीछा करके उन्हें दबोच लिया।