नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ छात्रों का विरोध प्रदर्शन

Daily news network Posted: 2019-01-10 18:39:36 IST Updated: 2019-01-10 18:39:36 IST
नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ छात्रों का विरोध प्रदर्शन

नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर कई दिनों से विरोध जारी है। नई दिल्ली स्थित दिल्ली विश्व विद्यालय और जवाहरलाल नेहरु विश्व विद्यालय के छात्रों ने इस बिल का विरोध किया। दूसरी तरफ पूर्वोत्तर राज्यों में इस विधेयक को लेकर बवाल मचा हुआ है। बता दें कि नागरिकता (संशोधन) विधेयक 2016 को लेकर पूर्वोत्तर राज्यों में इस वक्त बवाल मचा हुआ है। लोकसभा में इस बिल के पास होने के बाद इन राज्यों में जगह-जगह हिंसा जारी है।



 

बता दें कि नागरिकता विधेयक 1955 में संशोधन करने के लिए नागरिकता विधेयक 2016 को लोकसभा में पेश किया गया है। संशोधित विधेयक पारित होने के बाद, बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से धार्मिक अत्याचार की वजह से भागकर 31 दिसंबर 2014 तक भारत में प्रवेश करने वाले हिन्दू, सिख, बौद्ध जैन, पारसी और ईसाई धर्म के लोगों को नागरिकता प्रदान करेगा। एजीपी एवं असम के अन्य संगठनों का कहना है कि इस विधेयक के प्रावधानों की वजह से 1985 असम समझौता अमान्य घोषित हो जाएगा। इस समझौते के तहत बिना धार्मिक भेदभाव किए हुए सभी अवैध शरणार्थियों को प्रत्यर्पित किया जाए जो 1971 के बाद राज्य में आए थे।

 


एएएसयू के महासचिव लुरीनज्योति गोगोई ने कहा, यह असम के समाज और क्षेत्र के सभी मूल निवासियों का संकट है। हम सरकार को किसी भी कीमत पर इस विधेयक को पारित करने की अनुमति नहीं देंगे। असम के पुलिस महानिदेशक कुलधर सैकिया ने कहा,  जिला अधीक्षकों को शांति कायम रखने का निर्देश दिया गया है। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त बल तैनात किए जाएंगे. सभी स्थानों पर गश्ती बढ़ा दी गई है।


 


वहीं भाकपा ने बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के गैर मुस्लिमों को भारत की नागरिकता देने संबंधी नागरिकता संशोधन विधेयक को संविधान के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के विरूद्ध बताते हुये सरकार से इस विधेयक को वापस लेने की मांग की है। भाकपा द्वारा जारी बयान के अनुसार यह विधेयक सिर्फ मुस्लिमों को छोड़कर अन्य धर्मों के लोगों को नागरिकता देने का प्रावधान करता है। इसलिये यह संविधान के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के विरुद्ध है। पार्टी ने कहा कि कार्यकाल के अंतिम समय में पेश किया गया यह विधेयक चुनावी लाभ के मद्देनजर पेश किया गया।