इस सीट पर हमेशा से ही मुस्लिम प्रत्याशी ने दर्ज की है जीत, मोदी लहर में भी यहां नहीं खुल पाया था भाजपा का खाता

Daily news network Posted: 2019-05-23 07:59:42 IST Updated: 2019-05-23 07:59:42 IST
इस सीट पर हमेशा से ही मुस्लिम प्रत्याशी ने दर्ज की है जीत, मोदी लहर में भी यहां नहीं खुल पाया था भाजपा का खाता

17वीं लोकसभा चुनाव के तहत मतों की गिनती शुरु हो चुकी है। असम की धुबरी सीट की बात की जाएं तो यहां भी मतगणना प्रकिया शुरु हो चुकी है। इस सीट पर वोटिंग तीसरे चरण में 23 अप्रैल को हुई थी, जिसमें क्षेत्र के कुल 18,56,168 वोटरों में से 16,82,711 यानी 90.66 फीसदी लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था। सामान्य वर्ग वाली इस सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे ऑल इंडिया युनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) के बदरुद्दीन अजमल फिर से चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं कांग्रेस से अबू ताहेर बेपारी इस बार चुनाव मैदान में हैं। धुबरी लोकसभा सीट से कुल 15 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं।

 

 

 

पिछले चुनाव में इस सीट पर 88.22 फीसदी वोटिंग हुई थी। 2014 के चुनाव में बदरुद्दीन अजमल ने  एआईयूडीएफ के टिकट से कांग्रेस प्रत्याशी वाजिद अली चौधरी को 2 लाख 29 हजार 730 मतों के बड़े अंतर से हराया। उन्हें कुल 43.27 फीसदी वोट हासिल हुए। बदरुद्दीन को 5 लाख 92 हजार 569 मत मिले, वहीं दूसरे नंबर पर रहे वाजिद अली चौधरी को 3 लाख 62 हजार 839 वोट मिले थे। यहां तीसरे नंबर पर बीजेपी प्रत्याशी देबोमय सन्याल ने 2 लाख 98 हजार 985 मत हासिल किए थे। इस सीट पर 5811 लोगों ने किसी भी प्रत्याशी को नहीं चुना, यानि उन्होंने नोटा का बटन दबाया। इस सीट पर 88.36 फीसदी मतदान हुआ था। बता दें कि असम की धुबरी जिला ब्रह्मपुत्र और गदाधर नदी के किनारे बसा है। यह जिला तीन ओर नदियों से घिरा हुआ है, इसलिए इसे नदियों का शहर भी कहते हैं। धुबरी संसदीय सीट में 2011 की जनगणना के अनुसार यहां 27 लाख 71 हजार 883 जनसंख्या है। इसमें 89.1 फीसदी आबादी ग्रामीण जबकि 10.9 प्रतिशत आबादी शहरी है। इस सीट पर 3.54 फीसदी एससी और 5.78 फीसदी एसटी हैं। धुबरी में कुल मतदाताओं की संख्या 15 लाख 50 हजार 166 है। इसमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 7 लाख 97 हजार 235 है, जबकि महिलाओं की संख्या 7 लाख 52 हजार 931 है।

 



असम की धुबरी लोकसभा सीट पर कांग्रेस ने सबसे ज्यादा बार जीत दर्ज की। यहां 1951 में हुए पहले लोकसभा चुनाव में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के प्रत्याशी अमजद अली ने जीत दर्ज की। 1957 में हुए चुनाव में भी अमजद ही जीते, लेकिन इस बार उन्होंने कांग्रेस के टिकट से जीत दर्ज की। 1962 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी गयासुद्दीन अहमद  जीते। 1967 के चुनाव में एक बार फिर प्रजा सोशलिस्ट पार्टी ने इस सीट पर कब्जा किया। इसके बाद 1971 से 2004 तक 9 बार हुए चुनावों में कांग्रेस प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की। 2004 में अनवर हुसैन ने असम गण परिषद के प्रत्याशी अफजालुर रहमान को 1 लाख 16 हजार 622 मतों से जीत दर्ज की थी। 2009 में हुए 15वें लोकसभा चुनाव में असम यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के प्रत्याशी बदरुद्दीन अजमल ने कांग्रेस प्रत्याशी को 1लाख 84 हजार 419 मतों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की। 2014 के चुनाव में फिर से बदरुद्दीन ने जीत दर्ज की।