असम के आदिवासी समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग, आंदोलन की चेतावनी

Daily news network Posted: 2018-04-12 12:23:49 IST Updated: 2018-04-12 12:23:49 IST
असम के आदिवासी समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग, आंदोलन की चेतावनी
  • असम के आदिवासी समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा तथा भूमि पट्टा प्रदान करने आदि मांगों को लेकर आदिवासी महासभा के नेतृत्व में विभिन्न आदिवासी संगठनों ने कोकराझाड़ के आमगुड़ी स्थित महामिलन एमई स्कूल के खेल मैदान में विशाल जनसभा का आयोजन किया ।

कोकराझाड़

असम के आदिवासी समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा तथा भूमि पट्टा प्रदान करने आदि मांगों को लेकर आदिवासी महासभा के नेतृत्व में विभिन्न आदिवासी संगठनों ने कोकराझाड़ के आमगुड़ी  स्थित महामिलन एमई स्कूल के खेल मैदान में विशाल जनसभा का आयोजन किया ।

 





इस अवसर आदिवासी महासभा के अध्यक्ष बोयल हैमब्रम तथा महासचिव बीरसिंह मुंडा ने कहा कि असम में युगों से रह रहे आदिवासी समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्रदान करने की  मांग को लेकर हम दशकों से आंदोलन कर रहे है । लेकिन केंद्र तथा  राज्य सरकार हमारी मांगों  की अनदेखी कर रही है। 





पिछले लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा ने हमसे वादा किया था कि अगर केंद्र तथा राज्य में भाजपा की सरकार बनती है तो असम में आदिवासियों  की समस्या का निश्वित रूप से  समाधान किया जाएगा । भाजपा पर भरोसा करके असम आदिवासियों ने लोकसभा तथा राज्य विधानसभा चुनाव में भाजपा को भारी मत से जिताया था । केंद्र तथा राज्य के सत्ता में आने के बाद भाजपा आदिवासियों की समस्याओं  को भूल गई ।

 





उन्होंने कहा कि हम अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आज भी आंदोलन कर रहे हैं लेकिन सरकार हमारी मांगों पर ध्यान नहीं दे  रही है । उन्होंने सरकार को चेताते हुए कहा कि अगर सरकार हमारी समस्या का स्थायी रूप से समाधान नहीं करती है तो आने वाले दिनों में सरकार को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। 






उन्होंने कहा कि हमारी प्रमुख मांगें है असम के विभिन्न आदिवासी समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्रदान करना, भूमि का पट्टा प्रदान करना और आदिवासी उग्रवादियों की समस्याओं का समाधान करना आदि । केंद्र तथा राज्य सरकार को चेताते हुए उन्होंने कहा कि अगर 26 जून के पहले असम के आदिवासियों की समस्याओं  का समाधान नहीं किया गया तो 26 जून को आदिवासी हूल दिवस से ही असम के आदिवासी समुदाय जोरदार ढंग से आंदोलन की  शुरुआत कर देंगे । इस दौरान उत्पन्न होने वाली किसी भी परिस्थिति के लिए दोनों सरकारें जिम्मेवार होंगी  ।