असमः 19 अप्रैल को युद्धभ्‍यास गगन शक्ति का जायजा लेंगी रक्षा मंत्री

Daily news network Posted: 2018-04-17 14:49:53 IST Updated: 2018-04-17 16:56:21 IST
असमः 19 अप्रैल को युद्धभ्‍यास गगन शक्ति का जायजा लेंगी रक्षा मंत्री
  • अब तक के सबसे बड़े युद्धभ्यास गगनशक्ति में वायुसेना चीन से लगने वाली उत्तर और पूर्वी सरहद पर अपनी पूरी मारक क्षमता का प्रदर्शन कर रही है।

गुवाहाटी।

अब तक के सबसे बड़े युद्धभ्यास गगनशक्ति में वायुसेना चीन से लगने वाली उत्तर और पूर्वी सरहद पर अपनी पूरी मारक क्षमता का प्रदर्शन कर रही है। इसके तहत वायुसेना के सबसे बड़े मालवाहक जहाज सी-17 ग्लोबमास्टर, आईएल 76, सी 130 जे सुपर हरक्यूलिस जैसे विमानों की मदद से ऊंचे पहाड़ी इलाकों में जवानों को उतारने का अभ्यास होगा। उल्लेखनीय है कि आने वाले 19 अप्रैल को खुद रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण असम के छबुआ एयर बेस जाकर गगनशक्ति युद्धभ्यास को देखेंगी। दिनभर वायुसेना की मारक क्षमता का खुद जायजा लेंगी।

 


 


पिछले 40 सालों में सबसे बड़े युद्धाभ्यास गगनशक्ति के दौरान वायुसेना चीन और पाकिस्तान से लगने वाली दोनों सरहद पर एक साथ लड़ाई लड़ने यानि टू फ्रंट वार की रणनीति को अंजाम दे रही है। करीब 600 लड़ाकू विमानों, ट्रांसपोर्ट विमान और हेलीकॉप्टर्स को मिला दें तो करीब 1100 विमान और हेलीकॉप्टर इस युद्धाभ्यास में  हिस्सा ले रहे हैं। इनमें तेजस, सुखोई 30, मिग 29, जगुआर, मिराज-2000 सब शामिल हैं। अभ्यास का फोकस पाकिस्तान और चीन से लगी सीमा पर कार्रवाई की तैयारी करना है। इसके साथ ही वायुसेना के लड़ाकू हेलीकॉप्टर एमआई 26 और 17 ऊंची पहाड़ी इलाकों में एक घाटी से दूसरी घाटी में सेना के जवानों को पैराड्राप करने की भी ड्रिल कर रहा है।  लेह से लेकर उत्तराखंड और अरुणाचल तक चीन से लगने वाली सरहद पर वायुसेना एक साथ अपनी पूरी ताकत परख रही है।  युद्ध के हालात में किस तरह से थल सेना के साथ मिलकर चीन और पाकिस्तान को एक साथ मुंहतोड़ जवाब दे सकते हैं गगनशक्ति के दौरान इस बात की तस्दीक की जाएगी।  

 


 गौरतलब है कि भारत दो ओर से विदेशी सीमा पर अपनी सैन्य शक्ति में संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। सीमा पर सबसे बुरी स्थिति टू-फ्रंट वार के हालात में बन सकती है, जब सेना को पश्चिमी या फिर पूर्वी सीमा पर भेजना होगा। इसके बावजूद भारतीय वायु सेना की पूरी वार मशीनरी फिलहाल पैन इंडिया एक्सरसाइज 'गगन शक्ति' में लगाई गई है।

 

 


 एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, 'यह 1986-1987 के ऑपरेशन ब्रासस्टैक्स या 2001-2002 में ऑपरेशन पराक्रम के बाद हुआ सबसे बड़ा अभ्यास है, जब भारत लगभग संसद पर आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के साथ युद्ध करने के लिए तैयार हो गया था।' पाकिस्तान और चीन सीमा पर संभावित खतरे से निपटने के लिए कम से कम 42 फाइटर स्क्वाड्रोन्स की जरूरत है, लेकिन अभी खेमे में केवल 31 होने के बाद भी वायु सेना इस एक्सरसाइज की मदद से खुद को तैयार कर रही है।