त्रिपुरा: माकपा छोड़ बीजेपी में शामिल हो रहें हैं कार्यकर्ता,पार्टी में बढी बेचैनी

Daily news network Posted: 2018-04-20 09:45:23 IST Updated: 2018-04-20 09:45:23 IST
त्रिपुरा: माकपा छोड़ बीजेपी में शामिल हो रहें हैं कार्यकर्ता,पार्टी में बढी बेचैनी
  • त्रिपुरा में बीजेपी ने सत्ता की कमान के क्या संभाली राज्य में नई तरह की लड़ाई शुरू हो गई है। एक तरफ राज्य में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सहयोगी संगठनों में कार्यकर्ता और नेताओं की संख्या बढ़ी है

अगरतला

त्रिपुरा में बीजेपी ने सत्ता की कमान के क्या संभाली राज्य में नई तरह की लड़ाई शुरू हो गई है। एक तरफ राज्य में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सहयोगी संगठनों में कार्यकर्ता और नेताओं की संख्या बढ़ी है, तो वहीं दूसरी तरफ पार्टी में पहले से मौजूद संगठन के लोग नए लोगों के आने से असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

 

 


राज्य में सत्ता परिवर्तन के साथ ही सीपीएम के लोग और माकपा के मजदूर यूनियन सीटू के कार्यकर्ताओं अपना संगठन छोड़ बीजेपी के भारतीय मजदूर संघ में शामिल हो रहे हैं जिससे पार्टी में पहले के मौजूद लोग असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

 

 

 औपचारिक जॉइनिंग नहीं

 

 भारतीय मजदूर संघ के एक नेता ने कहा कि हमारे संगठन में पहले से जुड़े जितने लोग थे उन से 3 गुना ज्यादा लोग सीटू से भारतीय मजदूर संघ में आ गए हैं। उन्हें कोई औपचारिक तरीके से संगठन में शामिल नहीं कराया गया बल्कि वह खुद सीटू छोड़कर भारतीय मजदूर संघ में शामिल हो गए हैं और खुद को भारतीय मजदूर संघ का बताने लगे। वे अपनी मनमर्जी चलाने की कोशिश कर रहे हैं जिससे संगठन में पहले से जुड़े लोग नाराज हैं।

 

 


 

 एबीवीपी में शामिल होने की मची होड़

 

 संघ सूत्रों के मुताबिक सीपीएम के यूथ विंग डीवाईएफआई के लोग भी सत्ता बदलने के बाद बड़ी संख्या में एबीवीपी में शामिल हुए हैं। हालांकि संघ के एक सीनियर नेता के मुताबिक इस पर नजर रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि हम संगठन में पहले से शामिल लोगों की अनदेखी नहीं होने देंगे और उनकी भावनाओं का पूरा ख्याल रखा जाएगा। भले ही लाल की जगह लोगों ने भगवा झंडा लगा लिया है और संघ से जुड़े संगठनों में आने की होड़ मची है लेकिन संघ की शाखाओं में ये लोग नहीं पहुंच रहे हैं। अभी भी शाखाओं की संख्या उतनी ही है जितनी चुनाव से पहले थी। बीजेपी नेता सुनील देवधर ने बताया कि त्रिपुरा बीजेपी में फिलहाल हम नए सदस्य नहीं बना रहे हैं। इस पर छह महीने की रोक लगा दी थी। हम जो भी नए सदस्य बनाएंगे उनकी पृष्ठभूमि जांची जाएगी।

 

 

 


 रातों रात लाल झंडे की जगह फहरा भगवा झंडा

 

 सत्ता बदलते ही राज्य से रातों रात लाल झंडे उतर कर भगवा झंडे लग गए यह बात तो खुद बीजेपी के नेता भी मानते हैं। बीजेपी की जीत के बाद सुनील देवधर ने कहा कि, त्रिपुरा में जैसे बीजेपी जीती तो कैबिनेट गठन से पहले ही माफिया त्रिपुरा छोड़कर भाग गए। यह पूछने पर कि माफिया कहां भाग गए उन्होंने कहा कि बांग्लादेश या फिर पश्चिम बंगाल। देवधर ने कहा कि जो भी सिंडिकेट त्रिपुरा में काम कर रहे थे वह सत्ता बदलने के बाद सत्तारूढ़ पार्टी की तरफ आना शुरू हुए।

 


 उन्होंने कहा कि इसमें बीजेपी का कोई दोष नहीं है बल्कि सीपीएम ने वहां इसी तरह की संस्कृति बनाई है। देवधर ने माना कि त्रिपुरा में लोगों ने रातोंरात लाल झंडे हटाकर भारतीय मजदूर संघ के झंडे लगा लिए ।