1972 से एक छत्र राज है माकपा का आश्रमबारी सीट पर, क्या टूटेगा ये क्रम

Daily news network Posted: 2018-02-13 18:18:08 IST Updated: 2018-02-13 19:00:39 IST
1972 से एक छत्र राज है माकपा का आश्रमबारी सीट पर, क्या टूटेगा ये क्रम
  • त्रिपुरा में इस बार दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल सकता है। त्रिपुरा के विधानसभा चुनाव में इस बार सभी की नजरें आश्रमबारी सीट पर है।

त्रिपुरा में इस बार दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल सकता है। त्रिपुरा के विधानसभा चुनाव में इस बार सभी की नजरें आश्रमबारी सीट पर है। जहां 1972 से माकपा का दबदबा रहा है। 1972 से माकपा की प्रमुख विराेधी रही कांग्रेस भी नहीं जीती है। इस चुनाव कांग्रेस ने सुरेंद्र देवबर्मन को ताे भाजपा की सहयोगी पार्टी आर्इपीएफटी ने मेवार कुमार जमातिया को माकपा उम्मीदवार अघोर देवबर्मन के खिलाफ चुनावी मैदान में उतारा है। आपको बता दें कि माकपा के उम्मीदवार अघोर देवबर्मन ने पिछले चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार अमिया कुमार देवबर्मन को 7217 मतों से हराया था आैर माकपा के खाते में जीत दर्ज की थी।

 

  

 तो वहीं 2008 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने अमिया देवबर्मन पर दांव लगाया लेकिन इस बार कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था। इस बार अमिया देवबर्मन को महज 9234 तो वहीं दाे बार विधायक रह चुके माकपा उम्मीदवार सचिद्र देवबर्मन को 13765 वोट मिले। इससे पहले 2003 में हुए चुनाव में माकपा ने सचिद्र देवबर्मन को कांग्रेस ने अमिया का चुनावी मैदान में उतारा आैर इस बार कांग्रेस को 1486 वोटों से हारना का सामना करना पड़ा आैर माकपा का दबदबा इस सीट पर कायम रहा ।

 

 1998 में माकपा ने इस सीट पर महिला उम्मीदवार संध्या रानी देव बर्मा को टिकट दिया तो कांग्रेस ने कृपा साधन जमातिया को। लेकिन इस बार भी कांग्रेस का दांव फेल रहा आैर कांग्रेस उम्मीदवार कृपा साधन को 2658 वोट तो वहीं माकपा उम्मीदवार संध्या को 11907 वोट मिले आैर इा बार भी माकपा के सर जीत का सेहरा सजा। 1993 में माकपा की आेर से चार बार विधायक रह चुके बिंध्या चंद्र देव बर्मन तो वहीं दूसरी आेर उनके खिलाफ मैदान में कांग्रेस उम्मीदवार सुधीर देव बर्मन थे। 1993 के चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार सुधीर को मात्र 2407 संतोष करना पड़ा तो वहीं बिंध्या चंद्र को 14820 वोट मिले।

 

 1988 के विधानसभा चुनाव में माकपा के बिंध्या चंद्र देव बर्मन ने कांग्रेस उम्मीदवार अरूण कुमार देवबर्मन को 9386 मतों से हराकर माकपा की शानदार जीत दर्ज की। इससे पहले 1983 में हुए चुनाव में भी माकपा की आेर से बिंध्या चंद्र देव बर्मन का ही टिकट मिला था आैर उस समय भी बिंध्या चंद्र देव बर्मन ने कांग्रेस उम्मीदवार किशालय कांती देवबर्मन को बुरी तरह मात दी थी। इस बार भी माकपा के खाते में जीत दर्त हुर्इ थी। 1983 में बिंध्या चंद्र ने  कांग्रेस उम्मीदवार किशालय कांती को 9769 मतों से हराया था।

 

 

1977 में बिंध्या चंद्र देव बर्मन पहली बार माकपा की टिकट से चुनाव लड़ रहे थे आैर इस बार कांग्रेस ने दयानंद देव बर्मन को  बिंध्या चंद्र देव बर्मन के खिलाफ चुनावी दंगल में उतारा लेकिन कांग्रेस जीत नहीं सकी कांग्रेस को इस सीट से मात्र 1125 वोट मिले आैर माकपा को 9506। अगर हम बात करें 1972 के विधानसभा चुनाव की तब भी इस सीट पर माकपा की ही विजय हुर्इ थी।

 

माकपा के उम्मीदवार नृपेंद्र चक्रबोर्ती ने कांग्रेस के उम्मीदवार अरूण कर को 2153 मतों से हराया था आैर माकपा की जीत दर्ज की थी। 1972 से ही इस सीट पर माकपा अजेय रही है आैर उसकी जीत का सिलसिला जारी रहा है। अब इस विधानसभा चुनाव में देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा इस सीट जीत दर्ज कर पाती है या माकपा का दबदबा इस बार भी कायम रहेगा।