इस राज्य में हुआ Congress का बहुत बुरा हाल, जानिए कैसे

Daily news network Posted: 2018-12-11 16:32:04 IST Updated: 2018-12-23 17:38:24 IST
  • सत्ता में वापसी का कांग्रेस का सपना धरा का धरा रह गया। मिजोरम के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया।

आईजोल।

सत्ता में वापसी का कांग्रेस का सपना धरा का धरा रह गया। मिजोरम के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया। मिजो नेशनल फ्रंट(एमएनएफ)ने अपने दम पर पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया है। पार्टी चीफ जोरामथंगा राज्य के अगले मुख्यमंत्री होंगे। एमएनएफ ने राज्य की कुल 40 विधानसभा सीटों में से 26 पर जीत दर्ज की है। वहीं कांग्रेस सिर्फ 5 सीटों पर सिमट गई।

 


2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 34 सीटें जीती थी जबकि एमएनएफ के खाते में 5 सीटें ही आई थी। राज्य में कांग्रेस की बुरी हार की मुख्य वजह लगातार पिछले 10 साल से पार्टी का सत्ता में होना था। एमएनएफ ने सत्ता विरोधी लहर का फायदा उठाया और जीत दर्ज की। राज्य में सत्ता विरोधी कितनी जबरदस्त थी इसकी गवाही है राज्य के मुख्यमंत्री ललथनहवला का दोनों सीटों से चुनाव हार जाना।

 


 मुख्यमंत्री ललथनहवला ने दक्षिण चम्फई और सेरछिप से चुनाव लड़ा था। दोनों सीटों से वह चुनाव हार गए। नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस का घटक होने के बावजूद एमएनएफ ने भाजपा से हाथ नहीं मिलाया। एमएनएफ ने चुनाव से पहले और चुनाव बाद भाजपा से गठबंधन करने से साफ इनकार कर दिया था।

 

 

इस बार के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की न सिर्फ सीटें कम हुई बल्कि वोट शेयर में भी जबरदस्त गिरावट देखने को मिला। कांग्रेस का वोट शेयर उतना ही रह गया जितना 2003 के विधानसभा चुनाव में था। 2018 में कांग्रेस का वोट शेयर गिरकर 30.2 फीसद पर आ गया। 2013 में कांग्रेस का वोट शेयर 44.63 फीसद था। इस तरह कांग्रेस के वोट शेयर में 14.61 फीसद की गिरावट आई है।

 


 आपको बता दें कि 2003 के बाद से कांग्रेस मजबूत होती जा रही थी। न केवल कांग्रेस की सीटें बढ़ रही थी बल्कि उसका वोट शेयर भी बढ़ रहा था। 1989 में कांग्रेस का वोट शेयर 34.85 फीसद था जो 1993 में घटकर 29.77 फीसद पर आ गया था लेकिन 2003 में पार्टी का वोट शेयर 30.06 फीसद हो गया। 2008 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की लोकप्रियता में जबरदस्त उछाल आया और उसका वोट शेयर बढ़कर 38.89 फीसद हो गया।