भारत के साथ सीमा मसले के समाधान पर चीन ने दिया बड़ा बयान

Daily news network Posted: 2019-05-29 14:33:06 IST Updated: 2019-05-29 21:12:45 IST
  • भारत में चीन के निवर्तमान राजदूत एवं विदेश उप मंत्री लुओ झाओहुई ने भारत एवं चीन के के बीच मैत्री एवं सहयोग की संधि और मुक्त व्यापार समझौता करने की जरूरत पर बल देते हुए कहा है कि सीमा मसले की बातचीत को जल्द अंजाम पर पहुंचाना एवं बेल्ट एंड रोड पहल (बीआरआई) में भारत की विकास रणनीति को स्थान देना...

नई दिल्ली/गंगटोक।

भारत में चीन के निवर्तमान राजदूत एवं विदेश उप मंत्री लुओ झाओहुई ने भारत एवं चीन के के बीच मैत्री एवं सहयोग की संधि और मुक्त व्यापार समझौता करने की जरूरत पर बल देते हुए कहा है कि सीमा मसले की बातचीत को जल्द अंजाम पर पहुंचाना एवं बेल्ट एंड रोड पहल (बीआरआई) में भारत की विकास रणनीति को स्थान देना चीन की सर्वाेच्च प्राथमिकता है।

 

 


 झाओहुई ने कल रात यहां अपने विदाई समारोह में विदेशी राजनयिकों, गणमान्य नागरिकों, पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत में दो बार नियुक्ति और भारतीय इतिहास के ज्ञाता के रूप में वह मानते हैं कि भारत एवं चीन के द्विपक्षीय संबंध निस्संदेह सबसे महत्वपूर्ण हैं। चीन भारत को बहुत महत्व देता है और संबंधों को बेहतर करने के लिए देश की नयी सरकार के साथ मिलकर काम करने का इच्छुक है।

 



उन्होंने कहा, 'हमें अपने रिश्तों को उतार-चढ़ाव के चक्र से उबार कर स्थिर करना चाहिए। हमें आपसी रिश्तों को प्रबंधन से ऊपर ले जाकर उसे सक्रियता से नया आकार देना चाहिए। हमें सहयोग पर ध्यान केन्द्रित करके मतभेदों को कम करना चाहिए। द्विपक्षीय मैत्री एवं सहयोग की संधि और मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करना, सीमा मसले पर बातचीत का जल्द समाधान निकालना और बीआरआई परियोजना में भारत की विकास रणनीतियों को समायोजित करना हमारे भविष्य के सहयोग की सर्वोच्च प्राथमिकताएं हैं।'


 लुओ झाओहुई ने कहा, 'हमें अंतरराष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय मुद्दों पर सहयोग एवं समन्वय को मजबूत करना चाहिए। वैश्वीकरण की प्रक्रिया को बनाये रखने और व्यापार में संरक्षणवादी नीतियों के विरोध को लेकर हमारे हित समान हैं। हमें 'भारत-चीन प्लस सहयोग' को आगे बढ़ाने की जरूरत है। हम दोनों देशों के रिश्तों को लेकर आशावान हैं तथा खुद को सौभाग्यशाली मानते हैं कि मेरा नया दायित्व भारत एवं चीन के संबंधों को बढ़ावा देने का अवसर देगा।'


 उन्होंने कहा कि भारत से उनके संपर्क के 30 वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार 20 करोड़ डॉलर सालाना से बढ़कर 95.5 अरब डॉलर हो गया है। दोनों देशों के लोगों के एक दूसरे के यहां आवाजाही कुछ सौ से बढ़कर 10 लाख से अधिक हो गयी है। बीस हजार से अधिक भारतीय छात्र चीन में पढ़ रहे हैं। एक हजार से अधिक चीनी कंपनियां भारत में कारोबार कर रहीं हैं और उनसे दो लाख लोगों को रोजगार मिल रहा है। उन्होंने बताया कि चीन के युवाओं में तीन चीजों का फैशन सिर चढ़ कर बोल रहा है, बॉलीवुड फिल्में, दार्जिलिंग चाय एवं योग आसनों का अभ्यास। चीन की विदेश सेवा में आने से पहले भारतीय कला के इतिहास के शोधार्थी रहे लुओ झाओहुई को यूनिटी इंटरनेशनल फाउंडेशन ने 'लाइफटाइम एचीवमेंट अवार्ड' से सम्मानित किया। लुओ झाओहुई ने सितंबर 2016 में भारत के राजदूत के रूप में कार्यभार संभाला था। इससे पहले वह 1980 के दशक में नई दिल्ली में तैनात रह चुके हैं।

 


 गौर हो कि पूर्वोत्तर रारत के राज्य अरुणाचल और सिक्किम की सीमाएं चीन से लगती है। जहां अरुणाचल के कुछ क्षेत्रों पर अपना दावा करता रहता है। इसके अलावा डोकलाम में भी भारत चीन की सेनाएं आमने सामने आ गई थी। यह गतिरोध करीब 70 दिन चला था।