भाजपा से गठबंधन तोडऩे की धमकी, सरकार पर संकट

Daily news network Posted: 2018-04-06 15:57:43 IST Updated: 2018-04-06 16:02:03 IST
भाजपा से गठबंधन तोडऩे की धमकी, सरकार पर संकट
  • असम में सत्तारुढ़ भाजपा और उसकी सहयोगी असम गण परिषद के बीच मतभेद गहरा गए हैं।असम गण परिषद ने भाजपा से गठबंधन तोडऩे की धमकी दे डाली है।

गुवाहाटी।

असम में सत्तारुढ़ भाजपा और उसकी सहयोगी असम गण परिषद के बीच मतभेद गहरा गए हैं।असम गण परिषद ने भाजपा से गठबंधन तोडऩे की धमकी दे डाली है। गुरुवार को असम गण परिषद ने कहा कि अगर राज्य के हित प्रभावित हुए तो वह गठबंधन से बाहर निकलने में नहीं हिचकिचाएगी। असण गण परिषद ने दोहराया कि पार्टी बांग्लादेशी हिंदुओं को भारतीय नागरिकता प्रदान करने को स्वीकार नहीं करेगी।


 

खानपारा में बूथ स्तर के पार्टी कार्यकर्ताओं की रैली को संबोधित करते हुए असम गण परिषद के अध्यक्ष और कृषि मंत्री अतुल बोरा ने कहा, हम मंत्री हो सकते हैं लेकिन हमें गठबंधन से बाहर आने में एक सेकैंड भी नहीं लगेगा। हमारे लिए असम के हित सर्वोपरि हैं, चाहे हम सत्ता में रहे या ना रहें। असम गण परिषद के चीफ के इस दावे को आगामी पंचायत चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। अगले साल असम में पंचायत चुनाव हैं। असम गण परिषद ने अकेले चुनाव लडऩे का फैसला किया है।



 बोरा ने कहा कि बांग्लादेशी हिंदुओं को भारतीय नागरिकता प्रदान करना हमें स्वीकार्य नहीं है। भाजपा और केन्द्र सरकार नागरिकता अधिनियम में संशोधन की कोशिश कर रही है ताकि बिना वैध दस्तावेजों के भी बांग्लादेश,पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए हिंदुओं, सिखों, बौद्धों, जैनियों, पारसियों और ईसाईयों जैसे अल्पसंख्यक समुदायों को भारतीय नागरिकता प्रदान की जाए। बोरा ने पार्टी कार्यकर्ताओं से असम गण परिषद को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए कहा। 




एजीपी अध्यक्ष ने पार्टी कार्यकर्ताओं को लोगों के साथ खड़ा रहने को कहा जैसा कि पार्टी ने हमेशा किया है। बोरा ने कहा, आगे बढ़ो और प्रत्येक चुनाव में जीत का झंडा लहराओ। असम के पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष प्रफुल्ला कुमार महंता ने कहा, असम में सिर्फ असम गण परिषद ही जाति, माटी और भेती के हितों की रक्षा कर सकती है।



 राज्य में जब असम गण परिषद की सरकार थी, तब कोई सांप्रदायिक तनाव नहीं था। एजीपी नेता और विज्ञान व तकनीकी मंत्री केशब महंता ने मांग की है कि एतिहासिक असम समझौते(1985) को पूरे तरीके से लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि ब्रह्मपुत्र में बार बार आने वाली बाढ़ को नेशनल एजेंडे के रूप में लेना चाहिए।