सरकार ने इस राज्य के लिए लिया अहम फैसला, ST सूची में संशोधन विधेयक को दी मंजूरी

Daily news network Posted: 2019-01-03 10:00:20 IST Updated: 2019-01-08 16:58:37 IST
सरकार ने इस राज्य के लिए लिया अहम फैसला, ST सूची में संशोधन विधेयक को दी  मंजूरी
  • केंद्रीय कैबिनेट ने अरुणाचल प्रदेश के लिए एक अहम फैसला लिया है। केंद्र सरकार ने राज्य के अनुसूचित जाति की सूची में संशाेधन करने की मंजूरी दे दी है।

नई दिल्ली।

केंद्रीय कैबिनेट ने अरुणाचल प्रदेश के लिए एक अहम फैसला लिया है। केंद्र सरकार ने राज्य के अनुसूचित जाति की सूची में संशाेधन करने की मंजूरी दे दी है। विधेयक में राज्य की एसटी सूची से अबोर अनुसूचित जनजाति को हटाने का प्रस्ताव रखा है। ऐसा इसलिए क्योंकि अबोर, अदि अनुसूचित जनजातियों की तरह ही हैं। वहीं खम्पति नाम की कोई भी अनुसूचित जनजाति न होने के कारण विधेयक में संशोधन कर उन्हें ताई खम्ती कर दिया गया है।

 


एसटी सूची में नहीं होगा ‘कोई नागा अनुसूचित जनजाति’  इस्तेमाल

 विधेयक में मांग की गई है कि सूची में मिश्मी-कमान (मीजू मिश्मी), इडु (मिश्मी) और तरावन (डिगरु मिश्मी) अनुसूचित जनजातियों को शामिल किया जाए। इसके साथ ही मोम्बा की जगह पर मोन्पा, मेम्बा, सतरंग, सजोलंग अनुसूचित जनजाति को शामिल करने का भी प्रस्ताव है। नोक्टे, टंगसा, टुटसा और वांगचो अनुसूचित जनजातियों की जगह राज्य की एसटी सूची में ‘कोई नागा अनुसूचित जनजाति’ का इस्तेमाल होगा।

 

 


विधेयक में संशोधन से मिलेगा समुदायों को लाभ

 इस विधेयक के कानून में बदलने के बाद नई सूची में शामिल समुदायों को अनुसूचित जातियों के लिए सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सकेगा। जिसमें हाईस्कूल के बाद स्कॉलरशिप, विदेश में शिक्षा के लिए स्कॉलरशिप, लोन में रियायत, अच्छी उच्च शिक्षा और लड़के-लड़कियों के लिए हॉस्टल शामिल हैं। इसके साथ विभिन्न सेवाओं और शिक्षा में आरक्षण का लाभ मिल सकेगा।

 


असम के लिए भी लिया गया अहम फैसला

 इसके साथ ही पूर्वोत्तर राज्य असम के लिए भी एक महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है। साल 1985 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में हुए असम समझौते विशेषकर धारा 6 को सही और प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए केंद्रीय कैबिनेट ने एक उच्च स्तरीय समिति के गठन का फैसला लिया है।

 

 


1985 से अब तक का ब्यौरा देगी कमेटी

 गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को बताया कि यह उच्च स्तरीय समिति अपनी रिपोर्ट में यह भी बताएगी कि असम समझौता कितने प्रभावी तरीके से लागू हुआ और 1985 से अब तक इसे लागू करने में कितनी प्रगति हुई, इसका ब्यौरा देगी। इसके साथ ही यह कमेटी असम के सभी हितधारकों से चर्चा करेगी कि असम विधानसभा और स्थानीय निकायों में असमियों को कितना आरक्षण दिया जाए। दरअसल असम समझौते के धारा 6 मे कहा गया है कि केंद्र सरकार संवैधानिक, वैधानिक और प्रशासनिक स्तर पर असम की संस्कृति, सांस्कृतिक धरोहरों, सामाजिक और भाषाई पहचान की रक्षा करेगी।