भाजपा करनी को भुगतेगी या केंद्र में फिर से गाढ़ेगी झंडा, कयासों के बाजार गर्म

Daily news network Posted: 2019-04-25 08:59:50 IST Updated: 2019-04-25 16:36:38 IST
  • भाजपा नेताओं के दावे अपनी जगह हैं, लेकिन प्रेक्षकों का मानना है कि नागरिकता संशोधन बिल-2016 के बाद से पूर्वोत्तर में भाजपा का ग्राफ गिरा है

गुवाहाटी।

असम में लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण का मतदान भी संपन्न हो चुका है। असम में तीन चरणों में मतदान संपन्न हुए हैं। सभी राजनीतिक पार्टियों के जनता लुभाने में अपनी जान झोंक दी है लेकिन इसके परिणाम 23 मई को आने हैं लेकिन उससे पहले कयासों के बाजार गर्म हैं। भाजपा नेताओं के दावे अपनी जगह हैं, लेकिन प्रेक्षकों का मानना है कि नागरिकता संशोधन बिल-2016 के बाद से पूर्वोत्तर में भाजपा का ग्राफ गिरा है और जनजातीय समुदाय में भाजपा के प्रति जो झुकाव देखने को मिल रहा था वह अब नहीं है।



 जबकि उसके स्थान पर कांग्रेस के प्रति झुकाव दिखने लगा है। साथ ही पूर्वोत्तर के हित का दावा करने वाली मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा के नेतृत्व वाली नेशनल पीपुल्स पार्टी का भी पूर्वोत्तर में इस बार प्रभाव देखने को मिल रहा है, इसलिए भाजपा के दावे में कितना दम है यह चुनाव परिणाम के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। पूर्वोत्तर के राज्यों में पिछले दिनों हुए विधानसभा चुनाव में जिस प्रकार भाजपा और उसके सहयोगी दलों को सफलता मिली, वैसी सफलता इस बार लोकसभा के चुनाव में मिलने की संभावना कम है।



इसी तरह से सीटों के बारे में बात करते हैं तो चूंकि इस बार जनजातीय क्षेत्र के 90 प्रतिशत काउंसलर भाजपा के साथ हैं इसलिए इस सीट पर भी एनडीए के प्रत्याशी मजबूत दिख रहे हैं। कलियाबर, सिलचर, धुबरी और तेजपुर में बदरुदीन अजमल की पार्टी यूडीएफ एवं कांग्रेस की स्थिति अच्छी बताई जा रही है। इधर, कोकराझार में स्थिति भिन्न है और संभावना यह व्यक्त की जा रही है कि यहां से निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव में जीत सकते हैं। वैसे कुछ जानकारों का कहना है कि असम के परिणाम अप्रत्याशित भी हो सकते हैं।