सुनील देवधर ने किया दावाः त्रिपुरा में मिली जीत से भाजपा को 2019 के चुनावों में होगा बड़ा फायदा

Daily news network Posted: 2018-03-14 12:05:57 IST Updated: 2018-03-14 16:44:21 IST
  • त्रिपुरा में बीजेपी का झंडा बुलंद करने वाले राज्य भाजपा प्रभारी सुनील देवधर ने कहा कि वहां की जीत देशद्रोह पर देशप्रेम की जीत है।

त्रिपुरा में बीजेपी का झंडा बुलंद करने वाले राज्य भाजपा प्रभारी सुनील देवधर ने कहा कि वहां की जीत देशद्रोह पर देशप्रेम की जीत है। यह जीत कोई रातों-रात नहीं मिली है। साढ़े तीन साल के अथक परिश्रम का फल जीत के रूप में मिला। उन्होंने कहा कि त्रिपुरा में जीत का फायदा बीजेपी को वर्ष 2019 लोकसभा चुनाव में मिलेगा। इससे पूर्वोत्तर के राज्यों में बीजेपी की लोकसभा सीटें बढ़ेंगी।

 

 


 


मुंबई प्रेस क्लब में पत्रकारों के साथ बातचीत करते हुए देवधर ने कहा कि गत 25 साल से त्रिपुरा में एंटी नेशनल गवर्नमेंट रही। त्रिपुरा में भय का माहौल था। भाजपा के 11 कार्यकर्ताओं की हत्या हो चुकी थी। ऐसे हालात में मैंने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से कहा कि भले ही मुझे अपनी जान गंवानी पड़े, लेकिन त्रिपुरा में भाजपा की जीत तय है। इस पर शाह ने कहा कि आपको मैंने वहां भेजा है,  इसलिए आप पर कोई भी हमले की हिम्मत नहीं करेगा। शाह की बातों ने मेरा डर खत्म कर दिया।




राजनीतिक हत्याओं के सवाल पर देवधर ने कहा कि उन्हें वहां और भी बहुत काम करने हैं। हमारी सरकार वहां के लोगों न्याय दिलाने की कोशिश करेगी। पत्रकार शांतनु भौमिक और सुमित दत्त भौमिक की हत्याओं की सीबीआई जांच की सिफारिश की जा चुकी है। त्रिपुरा में हिंसा और प्रतिमाओं को गिराने की घटना की बाबत उन्होंने कहा कि देव के मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद कहीं कोई हिंसा नहीं हुई है। भाजपा की जीत पर छिटपुट हिंसा हुई, जबकि इसके पहले सीपीएम की जीत पर भारी हिंसा होती थी।




पूर्वोत्तर में बीफ के समर्थन पर देवधर ने कहा कि बहुसंख्यकों की भावनाओं का ख्याल रखना जरूरी है। पूर्वोत्तर में अधिकांश लोग बीफ खाते हैं, वहां कुछ हिंदु जनजाति के लोग भी बीफ खाते हैं इसलिए हर जगह बैन लगाना संभव नहीं है। देवधर ने कहा कि चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का लाभ मिला। 2019 के लोकसभा चुनाव में पूर्वोत्तर में भाजपा लोकसभा की कई सीटे जीतेगी। त्रिपुरा में विकास की काफी संभावनाएं हैं। अब तक वहां रही सीपीएम सरकारों ने वहां के पर्यटन की उपेक्षा की। मां त्रिपुर सुंदरी देश के 51 शक्तिपीठों में से एक है। हमारी सरकार त्रिपुरा को पर्यटन स्थल के रूप में प्रचारित करेगी।