इस राज्य में चली Modi लहर, ये रहा सबूत

Daily news network Posted: 2018-12-11 16:13:46 IST Updated: 2018-12-23 17:37:22 IST
  • मिजोरम में 25 साल के इंतजार के बाद भाजपा का खाता खुला है। भाजपा ने राज्य के विधानसभा चुनाव में सिर्फ एक सीट पर जीत दर्ज की है।

आईजोल।

मिजोरम में 25 साल के इंतजार के बाद भाजपा का खाता खुला है। भाजपा ने राज्य के विधानसभा चुनाव में सिर्फ एक सीट पर जीत दर्ज की है। पार्टी ने विधानसभा की कुल 40 में से 39 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे। भाजपा के जिस उम्मीदवार ने जीत दर्ज की है वह भी इसी साल नवंबर में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुआ था। इनका नाम है बुद्ध धान चकमा। 

 



चकमा ललथनहवला के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। चकमा ने तुइचवांग सीट से जीत दर्ज की है। उन्होंने मिजो नेशनल फ्रंट(एमएनएफ) के रसिक मोहन चकमा को हराया। बुद्ध धान चकमा ने 1594 वोटों से जीत दर्ज की है। एक सीट पर जीत को भले ही भाजपा के विरोधी दल बड़ी बात ना माने लेकिन पार्टी के लिए यह काफी मायने रखती है। मिजोरम ईसाई बहुल राज्य है। राज्य में 87 फीसदी आबादी ईसाईयों की है। 

 



मिजोरम में भाजपा को ईसाई विरोधी पार्टी माना जाता है। मिजोरम की राजनीति में वहां के चर्च का बहुत प्रभाव है। वे खुलकर भाजपा को वोट नहीं देने की अपील करते हैं। हालांकि भाजपा उम्मीदवार ने जिस विधानसभा सीट से जीत दर्ज की है वह चकमा बहुल है। लेकिन इस बार के विधानसभा चुनाव में जिस तरह से भाजपा का वोट शेयर बढ़ा है वह पार्टी के लिए बहुत बड़ी बात है। 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा का वोट शेयर 0.37 फीसद था जो 2018 में बढ़कर 8.1 फीसद हो गया है। इस तरह भाजपा के वोट शेयर में 7.9 फीसद की बढ़ोतरी हुई है। 



 

भाजपा ने 1993 में पहली बार चुनाव लड़ा था। तब 8 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे। हालांकि पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाई। 1998 में भाजपा ने 12, 2008 में 9 और 2013 में 17 सीटों पर चुनाव लड़ा। तीनों चुनावों में भाजपा का खाता नहीं खुला। यही नहीं भाजपा का वोट शेयर भी लगातार गिरता गया। 1993 में भाजपा का वोट शेयर 3.11 फीसद था जो 1998 में घटकर 2.50 फीसद रह गया। 2003 में यह घटकर 1.87 फीसद पर आ गया। इसके बाद भाजपा का वोट शेयर लगातार घटता ही गया। 2008 में भाजपा का वोट शेयर 0.44 फीसद था जो 2013 में घटकर 0.37 फीसद पर आ गया।