भाजपा नेता का बड़ा बयान, बिहार में भी लागू हो एनआरसी

Daily news network Posted: 2019-09-04 15:56:59 IST Updated: 2019-09-04 15:56:59 IST
भाजपा नेता का  बड़ा बयान, बिहार में भी लागू हो एनआरसी
  • नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन (NRC) के मुद्दे पर जदयू और बीजेपी के बीच मतभेद एक बार फिर सामने आ गए हैं। भारतीय जनता पार्टी ने जहां इसका दायरा बढ़ाकर दूसरे राज्यों में करने और बिहार और पश्चिम बंगाल में एनआरसी की वकालत की है, वहीं जदयू ने इस मसले पर रुख स्पष्ट कर दिया है।

गुवाहाटी

नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन (NRC) के मुद्दे पर जदयू और बीजेपी के बीच मतभेद एक बार फिर सामने आ गए हैं। भारतीय जनता पार्टी  ने जहां इसका दायरा बढ़ाकर दूसरे राज्यों में करने और बिहार और पश्चिम बंगाल में एनआरसी की वकालत की है, वहीं जदयू ने इस मसले पर रुख स्पष्ट कर दिया है। पार्टी ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने एनआरसी का गठन सिर्फ असम के लिए किया था। इसलिए इसे बिहार या किसी अन्य राज्य में फैलाने की जरूरत नहीं है।

 

  

बता दें कि जदयू और बीजेपी के बीच इस मुद्दे पर आपस में ठन गई है। दरअसल  पूर्व आरएसएस पदाधिकारी और वर्तमान में भाजपा के राज्यसभा सदस्य राकेश सिन्हा ने कहा कि बिहार के सीमावर्ती इलाके में एनआरसी की मांग कर दी। उन्होंने कहा कि बिहार के सीमावर्ती जिलों में जिस प्रकार आबादी बढ़ती जा रही है, इससे साबित होता है कि यहां पर बड़ी संख्या में बांग्लादेशी नागरिक आकर बस गए हैं।

 


 


बीजेपी सांसद ने कहा कि असम और बिहार के सीमांचल में कोई बुनियादी अंतर नहीं है। यदि एनआरसी असम के लिए आवश्यक है तो उससे कम आवश्यक सीमांचल के लिए नहीं है। सीमांचल की जनसंख्या में हुई वृद्धि का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि कटिहार, किशनगंज, पूर्णिया और अररिया जिलों में खास तौर पर एनआरसी की सख्त जरूरत है। उन्होंने दावा किया कि इन इलाकों में जनसंख्या वृद्धि स्वाभाविक, प्राकृतिक और देशज नहीं है।

 

  


वहीं, जदयू के प्रधान महासचिव केसी त्यागी ने कहा कि यह बहुत ही संवेदनशील मामला है और किसी भी हाल में देश के नागरिकों को बाहर नहीं भेजना चाहिए। जदयू नेता ने दो टूक लहजे में यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने एनआरसी का गठन सिर्फ असम के लिए किया था इसलिए इसे बिहार या अन्य राज्यों में फैलाने की जरूरत नहीं है।

  


 उन्होंने कहा कि इस मसले पर लगभग सभी दलों की एक राय है। बीजेपी के असम प्रदेश अध्यक्ष, असम गण परिषद समेत कई दलों के नेताओं ने सवाल उठाए हैं। एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट के अंदर सारे मामले विचाराधीन होंगे और अदालत के फैसले सबको मान्य होंगे।