'गांधी को हटाकर वामपंथियों ने छात्रों को माओ और मार्क्स के बारे में पढ़ाया'

Daily news network Posted: 2018-04-11 17:54:01 IST Updated: 2018-06-26 14:56:16 IST
'गांधी को हटाकर वामपंथियों ने छात्रों को माओ और मार्क्स के बारे में पढ़ाया'
  • त्रिपुरा में भाजपा और सीपीएम के नेतृत्व वाले लेफ्ट फ्रंट के बीच वैचारिक संघर्ष बढ़ गया है। राज्य की भाजपा सरकार सरकारी स्कूलों से वामपंथी विचारधारा से जुड़ी किताबें हटाने जा रही है,इसके लिए बाकायदा एक समिति भी बना दी गई है..

अगरतला।

त्रिपुरा में भाजपा और सीपीएम के नेतृत्व वाले लेफ्ट फ्रंट के बीच वैचारिक संघर्ष बढ़ गया है। राज्य की भाजपा सरकार सरकारी स्कूलों से वामपंथी विचारधारा से जुड़ी किताबें हटाने जा रही है,इसके लिए बाकायदा एक समिति भी बना दी गई है, जो राज्य शिक्षा बोर्ड की जगह स्कूलों में एनसीईआरटी(नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग) की किताबें लागू करने पर विचार करेगी। राज्य के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती वामपंथी सरकारों के प्रभाव में आकर राज्य शिक्षा बोर्ड दो दशक से वामपंथी दुष्प्रचार को प्रोत्साहित करने में लगा हुआ था जबकि भाजपा की नई सरकार साक्षरता का आंकड़ा बढ़ाने की बजाय गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का इंतजाम करना चाहती है।



उनका इशारा राज्य की 95 फीसदी साक्षरता दर की तरफ था। देब ने कहा कि उनकी सरकार सबके लिए शिक्षा और स्वास्थ्य पर जोर देगी। मुख्यमंत्री ने कहा, वामपंथी हमेशा चाहते थे कि त्रिपुरा के लोग हमारे हिंदू राजाओं को भूल जाएं। वे माओ(जेदोंग) के बारे में पढ़ें। उन्होंने सरकारी स्कूलों की पाठ्यपुस्तकों से महात्मा गांधी तक के संदर्भ हटा दिए, इसलिए अब मैं एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम राज्य के स्कूलों में लागू कर रहा हूं। इसमें त्रिपुरा के इतिहास से जुड़े अध्याय भी होंगे। 



हालांकि देब ने स्पष्ट किया नए सैलेबस में 10 फीसदी हिस्सा त्रिपुरा माध्यमिक शिक्षा मंडल(टीबीएसई) के पुराने पाठ्यक्रम का भी होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार स्टेट बोर्ड के सहारे अपनी सोच छात्रों पर मढ़ रही थी। वह माक्र्सवादियों का प्रोपेगैंडा फैला रही थी। अभी किताबों में रुस की क्रांति, फ्रांस की क्रांति, इंग्लैंड में क्रिकेट का जन्म, एडोल्फ हिटलर और कार्ल माक्र्स के बारे में पढ़ाया जाता है लेकिन हमारे स्वतंत्रतता सेनानियों के बारे में कुछ नहीं पढ़ाया जाता। 



किताबों में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, सुभाष चंद्र बोस आदि के बारे में जानकारी नहीं है। हमारी सरकार ने स्टेट बोर्ड में एनसीईआरटी की पुस्तकें लाने पर विचार के लिए एक कमेटी बनाई है। आपको बता दें कि 2018 के विधानसभा चुनाव में सीपीएम के नेतृत्व वाले लेफ्ट फ्रंट का सूपड़ा साफ हो गया था। राज्य में पहली बार भाजपा की सरकार बनी।