त्रिपुरा: जिष्णु देबबर्मा के सामने बड़ी चुनौती, कहीं शिबू सोरेन जैसा ना हो जाए हाल

Daily news network Posted: 2018-03-13 14:36:06 IST Updated: 2018-03-13 15:29:04 IST
त्रिपुरा: जिष्णु देबबर्मा के सामने बड़ी चुनौती, कहीं शिबू सोरेन जैसा ना हो जाए हाल
  • त्रिपुरा में विधायक बनने से पहले ही उप मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले जिष्णु देबबर्मा के सामने अपनी साख बचाने की चुनौती है

अगरतला।

त्रिपुरा में विधायक बनने से पहले ही उप मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले जिष्णु देबबर्मा के सामने अपनी साख बचाने की चुनौती है। देबबर्मा चारिलाम विधानसभा सीट से चुनाव लडऩे वाले थे, लेकिन एक उम्मीदवार का निधन हो जाने के चलते इस सीट पर चुनाव टल गया। सोमवार (12 मार्च) को चारिलाम सीट पर वोटिंग हुई। हालांकि इस सीट से सीपीएम ने अपना उम्मीदवार नहीं उतारा, ऐसे में देबबर्मा का राह आसान दिख रही है, लेकिन जनता कब किसका खेल बिगाड़ दे कहा नहीं जा सकता है।

 

 


 साल 2008 की बात की जाए तो झारखंड के निर्दलीय विधायक मुख्यमंत्री मधु कोड़ा की सरकार के पतन के बाद झारखंड मुक्ति मोचा के सुप्रीमो शिबू सोरेन के नेतृत्व में सरकार का गठन हुआ था। उस समय भी वे लोकसभा के सदस्य थे और संविधान के प्रावधानों के अनुसार छह महीने के भीतर उन्हें राज्य विधानसभा के लिए सदस्य चुना जाना अनिवार्य था। तब सोरेन ने तमाड़ सीट से उपचुनाव लड़ा। उपचुनाव में झारखंड पार्टी के उम्मीदवार गोपाल कृष्ण पातर उर्फ  राजा पीटर ने उन्हें 10 हजार से अधिक मतों से पटखनी दे दी। सोरेन के पास कोई चारा नहीं था। 12 जनवरी को उन्हें मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा और इसके बाद किसी ने सरकार बनाने का दावा पेश नहीं किया, जिसके चलते झारखंड में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया।

 



जानिए कौन हैं  जिष्णु देब बर्मा

 बता दें कि  जिष्णु देब बर्मा त्रिपुरा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव थे और हाल के दिनों में उन्हें बीजेपी के जनजातीय प्रकोष्ठ का अध्यक्ष बनाया गया। मशहूर संगीतकार सचिन देव बर्मन भी जिष्णु देब बर्मा के करीबी रिश्तेदार रहे हैं। इतने सालों से पार्टी के लिए काम करने वाले देबबर्मा कहते हैं कि वो कभी चुनाव लडऩा नहीं चाहते थे, वो तो आजाद पंछी की तरह रहना चाहते थे। देबबर्मा कहते हैं कि कभी हमारा परिवार यहां राज करता था। मुझे कभी अच्छा नहीं लगता था कि हाथ जोड़कर वोटों की भीख मांगूं और लोगों से झूठे वादे करूं, ये मेरे अंदर नहीं है, मैं लोगों को बरगलाना नहीं चाहता, मगर राजनीति में तो सबकुछ चलता है।

 


 उनका कहना था कि उन्हें मतगणना के बाद अचानक राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का फोन आया। अमित शाह ने ही उनसे विधायक दल की बैठक में शामिल होने को कहा और ये भी कहा कि उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया जा रहा है। देबबर्मा खुश हैं कि पार्टी ने उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाने का निर्णय लिया है, मगर चुनाव जीतना भी उनके लिए बड़ी चुनौती है। वो अपने विधानसभा क्षेत्र का सघन दौरा भी करते हैं और मंत्रिमंडल के गठन के बारे में भी मुख्यमंत्री से चर्चा करते हैं। भाजपा को लगता है कि ये सीट देबबर्मा आसानी से जीत लेंगे क्योंकि इस इलाके में उनके और राजघराने के लिए काफी श्रद्धा भाव है।



 चारीलाम सीट पर रहा है लेफ्ट का दबदबा

 बता दें कि त्रिपुरा की चारीलाम विधानसभा सीट पर हमेशा से ही लेफ्ट का दबदबा रहा है। 10 में से 5 बार सीपीएम, 3 बार कांग्रेस और एक एक बार सीपीआई व टीयूएस के उम्मीदवार ने इस सीट से जीत दर्ज की है। पिछले चुनाव (2013) में यहां से सीपीएम के रामेन्द्र नारायण देबबर्मा ने जीत दर्ज की थी। उन्होंने कांग्रेस के हिमानी देबबर्मा को 1,341 वोटों से हराया था। देबबर्मा को कुल 16,479 वोट पड़े थे, जबकि हिमानी को 15.138। हालांकि चुनाव जीतने के बाद भाजपा और संघ पर त्रिपुरा में हिंसा फैलाने का आरोप लगा सीपीएम ने इस चुनाव में चारीलाम सीट से अपना उम्मीदवार खड़ा नहीं किया है।