त्रिपुरा के पुष्पावंत महल को संग्रहालय बनाने जा रही बिप्लब सरकार, शाही वंशज ने किया विरोध

Daily news network Posted: 2018-04-23 09:58:11 IST Updated: 2018-04-23 09:58:11 IST
त्रिपुरा के पुष्पावंत महल को संग्रहालय बनाने जा रही बिप्लब सरकार, शाही वंशज ने किया विरोध
  • राज्य के सदियों पुराने पुष्पावंत महल को संग्रहालय बनाने का त्रिपुरा सरकार ने फैसला लिया।

अगरतला।

 राज्य के सदियों पुराने पुष्पावंत महल को संग्रहालय बनाने का त्रिपुरा सरकार ने फैसला लिया। दूसरी तरफ त्रिपुरा के शाही घराने के वंशज ने सरकार के फैसले का विरोध किया है। त्रिपुरा सरकार ने हाल में एक अधिसूचना जारी कर यह घोषणा की थी कि पुष्पावंत महल को संग्रहालय में परिवर्तित किया जाएगा। सरकार ने नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर को समर्पित शोध केंद्र स्थापित किए जाने की बात भी कही है। वहीं त्रिपुरा के अंतिम राजा बीर बिक्रम किशोर के पौत्र प्रद्योत किशोर देबबर्मा ने राज्य सरकार के फैसले का विरोध किया है। देबबर्मा ने सदियों पुराने पुष्पावंत महल को संग्रहालय में तब्दील करने के त्रिपुरा सरकार के फैसले का विरोध करने के साथ ही इसे स्थानीय मूल धरोहरों को हथियाने वाला कदम करार दिया।



 

 

किशोर देबबर्मा ने कहा कि मैं किसी भी प्राचीन धरोहर या महल का नाम बदले जाने के खिलाफ  हूं। यह सुनकर दुख होता है कि त्रिपुरा सरकार पुष्पावंत महल (राज्यपाल के आवास) का नाम बदलकर रवींद्रनाथ टैगोर संग्रहालय करेगी। हालांकि, इस संबंध में राजभवन के सचिव समरजीत भौमिक ने स्पष्ट किया है कि महल का नाम बदलने का कोई सवाल नहीं उठता। उन्होंने कहा कि पुष्पावंत महल को टैगोर संग्रहालय के रूप में तब्दील किया जाएगा। बहरहाल, देबबर्मा को जब यह बताया गया कि राज्य सरकार की महल का नाम बदलने की कोई मंशा नहीं है। इस पर देबबर्मा ने कहा कि वे सांस्कृतिक रूप से हर धरोहर को हथियाने की कोशिश कर रहे हैं। अंतत: वे महल का नाम बदल देंगे। मैं जानना चाहता हूं कि किसी ऐतिहासिक स्थल को संग्रहालय में क्यों तब्दील किया जायेगा।

 


 

 

बकौल देबबर्मा, टैगोर त्रिपुरा के महाराजाओं के अच्छे मित्र थे और सरकार बेवजह इसे विवाद में घसीट रही है। देबबर्मा ने मौजूदा सरकार को पूर्ववर्ती वाम मोर्चा शासन को एक समान बताया, जिसने उज्जयंत महल को संग्रहालय में तब्दील करने की कोशिश की थी। बताया जाता है कि साल 1972 से यह महल राज्य के राज्यपालों के आधिकारिक आवास के तौर पर इस्तेमाल किया जाता रहा है। राज्यपाल तथागत रॉय का निवास स्थान अब नया राजभवन हो गया है। बता दें कि विगत 18 अप्रैल को राजधानी परिसर में नये राजभवन का उद्घाटन हुआ था।