'खतरनाक है बीजेपी, भूलकर भी इसे वोट मत देना...'

Daily news network Posted: 2018-02-12 10:38:20 IST Updated: 2018-02-12 10:38:20 IST
'खतरनाक है बीजेपी, भूलकर भी इसे वोट मत देना...'
  • राज्य में बैप्टिस्ट चर्चों की सर्वोच्च संस्था नागालैंड बैपटिस्ट चर्च परिषद (एनबीसीसी) ने नगालैंड की सभी पार्टियों के अध्यक्षों के नाम एक खुला खत लिखा

कोहिमा।

बैपटिस्ट चर्च ने बीजेपी पर सीधा हमला बोला है। बैपटिस्ट चर्च की तरफ  से कहा गया है कि अनुयायी पैसे और विकास की बात के नाम पर ईसाई सिद्धांतों और श्रद्धा को उन लोगों के हाथों में न सौंपे जो यीशु मसीह के दिल को घायल करने की फिराक में रहते हैं।

 



 राज्य में बैप्टिस्ट चर्चों की सर्वोच्च संस्था नागालैंड बैपटिस्ट चर्च परिषद (एनबीसीसी) ने नगालैंड की सभी पार्टियों के अध्यक्षों के नाम एक खुला खत लिखा है। इस खुले खत में लिखा गया है 2015-2017 के दौरान आरएसएस समर्थित भाजपा सरकार में भारत ने अल्पसंख्य समुदायों के लिए में सबसे बुरा अनुभव किया है। एनबीसीसी ते महासचिव ने कहा कि हम इस बात से इनकार नहीं कर सकते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में आरएसएस की राजनीतिक शाखा बीजेपी के सत्ता में रहने की वजह से हिंदुत्व का आंदोलन अभूतपूर्व तरीके से मजबूत और आक्रामक हुआ है।

 


 एनबीसीसी के महासचिव ने पत्र में कहा कि प्रभु जरूर रो रहे होंगे जब नगा नेता उन लोगों के पीछे गए जो भारत में हमारी जमीन पर ईसाई धर्म को नष्ट करना चाहते हैं। चर्च के द्वारा लिए गए इस अभूतपूर्व फैसले पर जब एनबीसीसी के महासचिव झेलहोउ केयहो से सवाल किया गया तो उन्होंने एक वेबसाइट को बताया कि इस बार आरएसएस समर्थित बीजेपी वाकई में खतरा बन चुकी है। इसलिए हमने सोचा के हमें एक मजबूज फैसला लेना चाहिए न केवल चर्चों के लिए, बल्कि सामान्य रूप से देश में ईसाइयों के लिए भी।

 

 

 चर्च के नेता ईसाई बाहुल्य तीन राज्यों मेघालय, नगालैंड और मिजोरम में बीजेपी की राजनीतिक महत्वाकाक्षाओं को लेकर सावधान हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीति की खातिर नहीं, बल्कि उत्तर पूर्वी भारत में बीजेपी-आरएसएस गठबंधन के मुद्दे को देखते हुए साबित हुआ है। केयहो ने असम में आरएसएस के द्वारा किए जा रहे सम्मेलनों की ओर इशारा करते हुए कहा कि मेघायल और नगालैंड में इसके झटके महसूस किए जा रहे हैं। हालांकि कहा जा रहा है कि बीजेपी बीफ बैन और अल्पसंख्यों, खासकर ईसाइयों खिलाफ अत्याचार की वजह से राज्य में अपनी बढ़ती मौजूदगी दर्ज कराने के बावजूद बैकफुट पर नजर आ रही है। इस वजह से बीजेपी को क्षेत्रीय पार्टियों के साथ रणनीतिक गठजोड़ करके चुनाव में उतरना पड़ रहा है।