दलित समाज के लिए किया काम, सुनील देवधर ने दिया बालासाहेब देवरस समरसता पुरस्कार

Daily news network Posted: 2018-04-15 13:09:41 IST Updated: 2018-04-15 13:09:41 IST
दलित समाज के लिए किया काम, सुनील देवधर ने दिया बालासाहेब देवरस समरसता पुरस्कार
  • डॉक्टर बाबा साहेब अम्बेडकर की 127वीं जयंती पूरे देश में धूमधाम से मनाई गई। इस मौके पर राजनीतिक पार्टियों सहित कई समाजिक दलों ने अंडेबकर को याद किया।

डॉक्टर बाबा साहेब अम्बेडकर की 127वीं जयंती पूरे देश में धूमधाम से मनाई गई। इस मौके पर राजनीतिक पार्टियों सहित कई समाजिक दलों ने अंडेबकर को याद किया। इस मौके पर मुंबई में भी कई कार्यक्रम हुए। त्रिपुरा में भाजपा की जीत का प्रमुख चेहरा रहे सुनील देवधर ने भी एक कार्यक्रम में शिरकत की। उन्होंने सोशल मीडिया साइट फेसबुक पर एक पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी। उन्होंने इस पोस्ट में लिखा कि मुंबई में बाबासाहेब अम्बेडकर और महात्मा ज्योतिबा जयंती के संयुक्त कार्यक्रम में दलित समाज के लिए निरपेक्ष भावना से काम करने वाले संदीप मोरे ( मातंग समाज), मधुकर कानडे ( जोशी समाज) और उमाकांत डोईफोडे (रोहिदास समाज) को बालासाहेब देवरस समरसता पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

 




जानिए कौन हैं बालासाहब

बाला साहब देवरस का जन्म 11 दिसम्बर 1915 को नागपुर में हुआ था। उनके पिता सरकारी कर्मचारी थे और नागपुर इतवारी में इनका घर था। यहीं देवरस परिवार के बच्चे व्यायामशाला जाते थे 1925 में संघ की शाखा प्रारम्भ हुई और कुछ ही दिनों बाद बालसाहेब ने शाखा जाना प्रारम्भ कर दिया। स्थायी रूप से उनका परिवार मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के आमगांव के निकटवर्ती ग्राम कारंजा का था। उनकी सम्पूर्ण शिक्षा नागपुर में ही हुई। न्यू इंगलिश स्कूल मे उनकी प्रारम्भिक शिक्षा हुई। संस्कृत और दर्शनशास्त्र विषय लेकर मौरिस कालेज से बालसाहेब ने 1935 में बीए किया। दो वर्ष बाद उन्होंने लॉ की परीक्षा उत्तीर्ण की। विधि स्नातक बनने के बाद बालसाहेब ने दो वर्ष तक अनाथ विद्यार्थी बस्ती गृह में अध्यापन कार्य किया। इसके बाद उन्हें नागपुर में नगर कार्यवाह का दायित्व सौंपा गया। 1965 में उन्हें सरकार्यवाह का दायित्व सौंपा गया जो 6 जून 1973 तक उनके पास रहा।



 

श्रीगुरू जी के स्वर्गवास के बाद 6 जून 1973 को सरसंघचालक के दायित्व को ग्रहण किया। सन् 1975 में भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी ने आपातकाल की घोषणा कर संघ पर प्रतिबन्ध लगा दिया। इसके बाद बाला साहब के मार्गदर्शन में विशाल सत्याग्रह हुआ और 1977 में आपातकाल समाप्त होकर संघ से प्रतिबन्ध हटा। स्वास्थ्य कारणों से उन्होंने साल 1994 में ही सरसंघचालक का दायित्व उन्होंने प्रो. राजेन्द्र प्रसाद उपाख्य को सौंप दिया। 17 जून 1996 को उनका निधन हुआ।