मूल निवासियों के लिए असम में आरक्षित होंगी विधानसभा सीटें

Daily news network Posted: 2019-01-11 15:55:23 IST Updated: 2019-01-12 08:27:52 IST

नई दिल्ली।

असम विधानसभा और स्थानीय निकाय की कितनी सीटों को राज्य के मूल निवासियों के लिए आरक्षित किया जाए, इसका पता लगाने के लिए केन्द्र ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। यह कदम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दिए उस बयान पर मचे बवाल के बाद सामने आया है, जिसमें उन्होंने नागरिकता कानून में संशोधन की बात कही थी। बता दें कि इसके खिलाफ राज्य के सामाजिक और छात्र संगठनों ने बंद बुलाया है। जिस उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है उसका नेतृत्व पूर्व केन्द्रीय पर्यटन सचिव एमपी बेजबरूआ करेंगे।

 

 

 

 

कमेटी का गठन 1985 के असम समझौते की धारा 6 के तहत किया गया है। इस संबंध में गृह मंत्रालय द्वारा जारी की गई अधिसूचना में कहा गया है कि समिति असम के लोगों के लिए राज्य सरकार में रोजगार के उचित स्तर की सिफारिश करेगी। समिति को 6 माह में अपनी रिपोर्ट देनी होगी। समिति के गठन का राज्य के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने स्वागत किया है। उन्होंने इसे एक महत्वपूर्ण फैसला बताते हए कहा कि यह असम समझौते पर हस्ताक्षर के 35 साल बाद सामने आया है।

 

 

 


उधर ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन(आसू) ने कहा है कि बिल समझौते की धारा 5 को खत्म कर देगा। इस धारा में 1971 के बाद राज्य में प्रवेश करने वाले सभी अवैध प्रवासियों को निकालने का प्रावधान है। भले ही व्यक्ति किसी भी धर्म से ताल्लुक रखता हो। नागरिकता संशोधन बिल बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के गैर मुस्लिम लोगों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने का प्रयास करता है। यह 2014 में भाजपा का चुनावी वादा था।