विदेश तक पहुंची मोदी सरकार के इस फैसले की आग

Daily news network Posted: 2018-05-14 13:50:48 IST Updated: 2018-08-13 14:46:08 IST
विदेश तक पहुंची मोदी सरकार के इस फैसले की आग
  • केंद्र सरकार के प्रस्तावित नागरिक संशोधन विधेयक, 2016 का पूरे असम में विरोध हो रहा है। इसे लेकर प्रदेश में प्रदर्शन शुरू हो गया है।

गुवाहाटी।

केंद्र सरकार के प्रस्तावित नागरिक संशोधन विधेयक, 2016 का पूरे असम में विरोध हो रहा है। वर्तमान समय में यह विधेयक सबसे विवादास्पद विषय बन गया है। इसके विरोध में प्रदेश के कई संगठन और आम आदमी भी आ गए हैं। अब ऑस्ट्रेलिया में रह रहे असमिया लोग भी नागरिक (संशोधन) विधेयक का विरोध कर रहे हैं।

 सोमवार को असमिया एसोसिएशन ऑफ ऑस्ट्रेलिया एक्ट एंड एनएसडब्ल्यू (एएए) ने संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के अध्यक्ष को असमिया आबादी को बचाने के लिए बिल को वापस लेने की दृढ़ता से सिफारिश की है।


 एएए ने संसद की संयुक्त चयन समिति के विचाराधीन नागरिकता अधिनियम के प्रस्तावित संशोधन पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है। एएए ने पत्र के जरिए कहा अगर असम में आए अल्पसंख्यक समुदायों, हिंदुओं, सिखों, बौद्धों, जैनों, ईसाईयों, पारसी जो अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से असम में आए हैं को नागरिकता प्रदान की जाती है तो यह असमिया लोगों के अस्तित्व के लिए खतरा होगा।

 



इस पत्र में आगे लिखा गया है कि देश के वास्तविक नागरिकों की जातीयता और भाषा की सुरक्षा के लिए जेपीसी को जमीन की वास्तविकता जानने के बाद और बिल वापस लेना चाहिए।


 एएए ने सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में असम में चल रही एनआरसी अद्यतन प्रक्रिया के बारे में बात करते हुए कहा कि 24 मार्च 1971 तक राज्य में स्थायी रूप से रहने वाले लोगों को शामिल कर लिया है, और अवैध रूप से राज्य में प्रवेश करने वाले कई विदेशी नागरिकों को देश से बाहर किया जाएगा।

 


 पत्र में कहा गया, 24 मार्च 1971 की कटऑफ तिथि से परे प्रदेश में नागरिकता बढ़ाने के लिए सरकार का वर्तमान प्रयास एएए और असम के लोगों को स्वीकार्य नहीं है। बांग्लादेश के नागरिकों की आवाजाही से राज्य पहले से ही अतिसंवेदनशील है क्योंकि असम के स्वदेशी लोगों के लिए गंभीर आर्थिक, सामाजिक और पहचान संकट है। इन परिस्थितियों में प्रस्तावित संशोधन मौजूदा स्वदेशी समुदायों के लिए अस्तित्व में खतरा बन गया है।

 


 एएए ने अंततः उपर्युक्त सभी मुद्दों के संदर्भ में जेपीसी को नागरिकता संशोधन विधेयक, 2016 को वापस लेने के लिए कहा।