BJP के शिक्षा मंत्री को भारी पड़ा बयान, टीचर्स ने चलाया 'मैं भी ड्राइवर' अभियान

Daily news network Posted: 2019-06-17 12:14:57 IST Updated: 2019-06-17 12:14:57 IST
BJP के शिक्षा मंत्री को भारी पड़ा बयान, टीचर्स ने चलाया 'मैं भी ड्राइवर' अभियान
  • BJP के शिक्षा मंत्री के बयान के खिलाफ टीचर्स 'मैं भी चौकीदार' अभियान की तर्ज पर 'मैं भी ड्राइवर' अभियान चला दिया है।

गुवाहाटी

असम की BJP सरकार के शिक्षा मंत्री को अपना एक बयान काफी भारी पड़ता दिख रहा है, जिसकी एवज मे राज्य के स्कूल टीचर्स ने भाजपा के लोकसभा चुनाव अभियान 2019 के मुख्य स्लोगन 'मैं भी चौकीदार' की तर्ज पर 'मैं भी ड्राइवर' अभियान छेड़ दिया है। टीचर्स का यह अभियान ट्वीटर और फेसबुक पर जबरदस्त वायरल हो रहा है। हालांकि शिक्षा मंत्री ने अपने बयान को गलत तरीके से लेने की बात कहते हुए कहा कि उनका मकसद टीचर्स और ड्राइवरों की तुलना करना नहीं था।

 

यह था मामला

दरअसल असम सरकार में शिक्षा मंत्री सिद्धार्था भट्टाचार्य ने अपने बयान में यह कहा दिया था की टीचर्स एलिजिबिलिटी यानी टेट ड्राइविंग लाइसेंस की तरह है और इसको समय—समय पर रेन्यूअल कराया जाना चाहिए। हालांकि यह सर्टिफिकेट प्राप्त टीचर्स राज्य के प्रथमिक और उच्च प्रथमिक विद्यालयों में कार्यरत हैं। इन टीचर्स ने शिक्षा मंत्री के बयान को दुखद बताते हुए सोशल मीडिया पर यह अभियान छेड़ा है।

 

7 साल तक के लिए मान्य होता सर्टिफिकेट

टेट पहला टेस्ट साल 2012 में जारी किया गया था जिसकी वैधता 7 सालों तक है। हालांकि असम में टेट सर्टिफिकेट प्राप्तकर्ता 41000 लोगों में कईयों ने इसको जारी रखने की मांग है। लेकिन सरकार अब 7 साल बाद एकबार फिर से यह टेस्ट आयोजित करने जा रही है। राज्य में अभी लगभग 36500 अध्यापकों के पद खाली पड़े हैं।

 

टीचर्स ने रखी ये मांग

जोरहाट के कुछ अध्यापकों ने अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पर कहा है कि वो ड्राइवर के पेशे का भी सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा कि भट्टाचार्य की उस टिप्पणी का विरोध अपने नाम के आगे 'मैं भी ड्राइवर' लिखकर कर रहे हैं। हालांकि इसके बाद मंत्री ने सफाई देते हुए कहा कि उनका कहने का मकसद बस इतना था कि जिस तरह ड्राइवर अपनी योग्यता दिखाने के लिए अपने लाइसेंस का रिन्यूअल कराते हैं, उसी तरह टीचर्स को भी अपनी योग्यता साबित करनी चाहिए।

 

आॅल असम स्टूडेंट यूनियन भी विरोध में उतरी

शिक्षा मंत्री के इस बयान के विरोध में आॅल असम स्टूडेंट यूनियन भी उतर चुकी है। यह राज्य की सबसे बड़ी स्टूडेंट यूनियन है।