श्वेता अग्रवाल हत्याकांडः दोषी प्रेमी गोविंद को मृत्युदंड की सजा

Daily news network Posted: 2019-08-03 15:21:21 IST Updated: 2019-08-03 18:25:47 IST
  • बहन और मां को आजीवन कारावास,14 महीने में आया फैसला

गुवाहाटी

गुवाहाटी के श्वेता अग्रवाल हत्याकांड में शनिवार को सजा का एलान हो गया। श्वेता की हत्या के अभियुक्त गोविंद सिंघल को अदालत ने मृत्यदंड देने का फैसला सुनाया है। वहीं गोविंद की बहन भवानी सिंघल और उसकी मां कमला देवी सिंघल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कामरुप(मेट्रो) जिला सत्र न्यायाधीश अपरेश चक्रवर्ती की फास्ट ट्रैक अदालत ने यह सजा सुनाई। 



चौदह महीने तक चला केस

मालूम हो कि चौदह महीने अदालत में चले मामले के बाद अदालत ने 30 जुलाई को तीनों को अभियुक्त घोषित किया था। इस फैसले के बाद श्वेता के पिता ओमप्रकाश अग्रवाल ने कहा कि कानून अंधा नहीं है,यह प्रमाणित हो गया है। हम भगवान पर भरोसा करते हैं और मेरे लिए जज साहब भगवान हैं। मेरी एक ही बेटी थी जिसकी इन तीनों ने हत्या कर दी। अब मुझे शांति मिली है। इन्हें भी पता चलना चाहिए कि एक बेटी की हत्या करने से क्या होता है।

 

कैसे हुई थी हत्या

वर्ष 2015 की हायर सेकेंडरी परीक्षा में श्वेता वाणिज्य शाखा में टॉपर रही है। इसके बाद वह के सी दास कामार्स कालेज में स्नातक पांचवें सेमिस्टार में पढ़ रही थी। प्रेमी गोविंद सिंघल ने 4 दिसंबर 2017 को श्वेता की नृशंस हत्या कर दी थी। गुवाहाटी के शांतिपुर स्लुइस गेट के पास जेपी अग्रवाल रोड के एक वकील के घर में किराए के मकान में सिंघल परिवार रहता था। यहीं श्वेता का जला शव बरामद हुआ था। प्रतिभावान छात्रा की मौत से राज्यभर में विरोध हुआ और दोषियों की सजा की मांग उठी। पुलिस ने जांच की तो सामने आया कि श्वेता की हत्या की गई थी। श्वेता के साथ हुए झगड़े के बाद गोविंद ने दीवार में श्वेता को सिर से धक्का दिया। इसके बाद सबूत मिटाने के लिए उसने श्वेता का शव बस्ते में भरकर डस्टबिन में फेंकने का प्रयास किया। पर वह सफल नहीं हो सका। बाद में बाथरुम में लाकर किरासन डालकर जलाया। मामला सामने आने के बाद पुलिस ने गोविंद, उसकी बहन भवानी और मां कमला देवी को गिरफ्तार किया।

 


फास्ट ट्रेक में चला मामला

अप्रैल 2018 में सरकार ने मामले का संचालन करने वकील अभिजीत भट्टाचार्य को विशेष लोक अधिवक्ता नियुक्त किया। इसके बाद 14 मई 2018 से सत्र न्यायाधीश की अदालत में मामले की सुनवाई शुरु हुई। इस मामले में आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड विधान की धारा302, 201 और 120 (बी) लगाई गई थी। इस मामले में अदालत ने 23 लोगों का साक्ष्य लिया।