पहली बार बैकफुट में आई मोदी सरकार, वापस लेना पड़ा ये बड़ा फैसला

Daily news network Posted: 2018-05-12 13:56:05 IST Updated: 2018-06-02 11:02:59 IST
पहली बार बैकफुट में आई मोदी सरकार, वापस लेना पड़ा ये बड़ा फैसला
  • केंद्र सरकार ने असम में भारी विरोध के बाद राज्य के चार विरासत स्थलों को अपनाने की परियोजना को वापस ले लिया है।

नई दिल्ली।

केंद्र सरकार ने असम में भारी विरोध के बाद राज्य के चार विरासत स्थलों को अपनाने की परियोजना को वापस ले लिया है। असम सरकार में पर्यटन मंत्री चंदन ब्रह्म के नेतृत्व में एक टीम ने नई दिल्ली में केंद्रीय पर्यटन मंत्री केजे अल्फोंस  से मुलाकात कर राज्य में प्रस्तावित योजना के खिलाफ नाराजगी की जानकारी दी। 





इस बैठक के बाद केंद्र सरकार ने विरासत परियोजना को अपनाने की मुहिम को वापस ले लिया है। इस बारे में राज्य मंत्री चंदन ब्रह्म ने जानकारी देते हुए बताया कि हमने केंद्रीय मंत्री से मुलाकात की और राज्य में इस फैसले के विरोध के बारे में उन्हें अवगत कराया। ब्रह्म ने कहा कि इस योजना के तहत प्रस्तावित असम के चार विरासत स्थलों को हटाने के लिए केंद्र सरकार ने सहमति दे दी है। केंद्र के इस प्रस्तावित परियोजना के तहत आने वाले शिवसागर जिले में आहोम काल के तीन स्मारक स्थल हैं, जिनमें रंगघर, कारेंग घर और शिव दौल है। रंगघर आठवीं सदी का एम्फीथिएटर है। कारेंग घर आहोम वंश का शाही महल और शिव दौल भगवान शिव का प्राचीन काल मंदिर है। 





इन सभी ऐतिहासिक धरोहरों के जीर्णोद्धार के लिए केंद्र सरकार ने इसे अपनाने की मुहिम शुरु की थी। इसके साथ ही एक सींग वाले गैंडे के विश्वविख्यात तथा विश्व धरोहरों में शामिल काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान को भी इस योजना के हिस्से के रूप में सौंपने का प्रस्ताव रखा गया था। हालांकि सरकार के इस फैसले का असम के स्थानीय सामाजिक संगठन विरोध कर रहे थे। हाल ही में दिल्ली के लाल किले को निजी हाथों में सौंपने का विरोध भी हुआ था।





 गौरतलब है कि केंद्र सरकार द्वारा पिछले साल सितंबर में प्रस्तावित इस परियोजना के तहत असम में तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम ने ऊपरी असम के ऐतिहासिक स्थलों को संरक्षित करने के लिए गोद लिया था। इसमें ओएनजीसी के अलावा भारतीय पुरात्तव सर्वेक्षण और एनसीएफ जैसी सहयोगी संस्था भी शामिल है। 3.96 करोड़ रुपए की लागत वाली इस परियोजना में आहोम कालके ऐतिहासिक स्मारक स्थलों को संरक्षित और सौंदर्यीकरण किया जाना था।