छठी क्लास में पढ़ रही थी तब उग्रवादी संगठन में भर्ती हुई, असम राइफल्स के जवानों ने छुड़ाया

Daily news network Posted: 2018-04-10 18:11:36 IST Updated: 2018-04-10 18:11:36 IST
छठी क्लास में पढ़ रही थी तब उग्रवादी संगठन में भर्ती हुई, असम राइफल्स के जवानों ने छुड़ाया
  • ये है 14 साल की मासूम जिसे असम राइफल्स के जवानों ने उग्रवादियों के चंगुल से छुड़ाया है। ये नाबिलग लड़की उस वक्त उग्रवादी संगठन यूएनएलएफ में भर्ती हो गई थी

ये है 14 साल की मासूम जिसे असम राइफल्स के जवानों ने उग्रवादियों के चंगुल से छुड़ाया है। ये नाबिलग लड़की उस वक्त उग्रवादी संगठन यूएनएलएफ में भर्ती हो गई थी जब वह छठी क्लास में पढ़ रही थी। उस वक्त इसे परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए अच्छी नौकरी का झांसा देकर उग्रवादी संगठन में भर्ती किया गया था। 

 

 

 

सोमवार को जब यह मासूम अपने परिवार से मिली तब वह बहुत ही भावुक क्षण था। इसमें असम राइफल्स का बहुत बड़ा योगदान है। असम राइफल्स ने प्रेस स्टेटमेंट में कहा, असम राइफल्स को म्यांमार स्थित थोंग्रेन शिविर से यूएनएलएफ की एक महिला कैडर के भागने के बारे में स्पेसिफिक इनपुट मिला था। असम राइफल्स ने उसे देखा तो महसूस हुआ कि वह नाबालिग है। असम राइफल्स के जवान तुरंत हरकत में आए और उसे उग्रवादी संगन यूएनएलएफ के चंगुल से मुक्त कराने में मदद की। 

 

 

 

इसके बाद भावुक क्षण आया जब 14 साल की लड़की मणिपुर पुलिस और स्टेट चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में अपने परिवार से मिली। बयान में बताया गया कि लड़की को जून 2017 में यूएनएलएफ के एसएस एसजीटी लोइबिकांबा ने भर्ती किया था। उस वक्त वह छठी क्लास में पढ़ रही थी। उसे अच्छी नौकरी दिलाने के बहाने भर्ती किया गया। म्यांमार के थोंग्रेन में यूएनएलएफ का  जनरल हेडक्र्वाटर है। 

 

 

 

 

यहां रहने के दौरान उससे खेतों में काम कराया गया। साथ ही उससे उग्रवादियों के लिए खाना बनवाया जाता था। इससे पता चलता है कि उग्रवादी समूह किस तरह बच्चों का शोषण करते हैं। 2017 के आखिरी में यह जानकारी मिली थी कि उग्रवादी समूह के उत्पीडऩ से तंग आकर थोंग्रेन में दो नाबालिग लड़कियों ने आत्महत्या कर ली है। इनमें से एक 15 साल की थी, वह कोन्थोउजाम की रहने वाली थी जबकि दूसरी की उम्र 17 साल थी। वह नाम्बोल के खाबी मयाई लैकई की रहने वाली थी।