Supreme Court का तल्ख आदेश, 31 अगस्त को ही जारी किया जाएगा NRC

Daily news network Posted: 2019-08-09 10:20:11 IST Updated: 2019-08-09 17:56:32 IST
  • असम विधानसभा में एनआरसी पर राज्य सरकार के बयान को दरकिनार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने काफी तल्ख लहजे में साफ कर दिया है

नई दिल्ली

असम विधानसभा में एनआरसी पर राज्य सरकार के बयान को दरकिनार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने काफी तल्ख लहजे में साफ कर दिया है कि आगामी 31 अगस्त को पूर्ण एनआरसी प्रकाशित करना ही होगा। अदालत ने इसके पहले की सुनवाई में राज्य संयोजक प्रतीक हाजेला के अनुरोध पर 31 जुलाई की जगह एक माह का समय और दे दिया था।

 


 

31 अगस्त तक प्रकाशित हो एनआरसी

 सुनवाई में 31 अगस्त की तिथि को दोहराते हुए मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने बड़े तल्ख लहजे में कहा कि हर सुबह हमारे फैसले की आलचोना का कोई अंत नहीं होगा। हमारे आदेशों, कार्यों और निर्णयों पर हर बार बहस होती है। हम उसमें जाने से इनकार करते हैं। उन्हें वह करने दें जो वे चाहते हैं, लेकिन हम 31 अगस्त तक एनआरसी को प्रकाशित करना चाहते हैं।

 



हाजेला ने दिया था मुख्यमंत्री का हवाला

 सुप्रीम कोर्ट ने यह प्रतिक्रया उस फैसले पर दी है, जिसमें असम में कई लाख लोगों को अपनी नागरिकता साबित करने के लिए फिर से नोटिस दिया गया है। एनआरसी संयोजक प्रतीक हाजेला ने अदालत के सामने असम विधानसभा के अलावा बाद में मुख्यमंत्री और उनके कानूनी सलाहकार तथा नेता विरोधी दल के बयानों का हवाला दिया था।

 

 


पुनर्सत्यापान की मांग

 केंद्र और राज्य सरकारें असम में चल रही एनआरसी प्रक्रिया में बड़ी संख्या में अवैध विदेशियों के नाम शामिल हो जाने की बात कर सीमाई जिलों में 20 फीसदी और अन्य जिलों में 10 फीसदी पुनर्सत्यापन कराने की मांग कर रही थीं। सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में ही इसे खारिज कर दिया था। हालांकि इसके बावजूद अगस्त के पहले सप्ताह में फिर से हजारों लोगों को अचानक पुनर्सत्यापन के नोटिस जारी कर 300 से 400 किमी दूर तक केंद्रों में जाने का फरमान सुनाया गया है। राज्य में इसकी वजह से एनारसी को लेकर हंगामा मचा हुआ है।

 

 


पारित करेगी आदेश

 सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने नागरकिता कानून, 2003 के प्रावधानों पर भी चर्चा की। ये प्रावधान एनआरसी के तहत लोगों पर विचार करने के मामले में अमल में लाए गए हैं। पीठ ने कहा कि हाजेला से नोट मिलने के बाद वह इस बारे में आदेश पारित करेगी कि क्या इस कानून की धारा 3(1)ए, 3(1)बी, और धारा 3(1)सी के आधार पर नाम शामिल किए जाएंगे।