मोदी सरकार के सबसे बड़े अभियान के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी ये संस्था, जानिए क्यों

Daily news network Posted: 2019-09-01 11:19:44 IST Updated: 2019-09-01 11:19:44 IST
मोदी सरकार के सबसे बड़े अभियान के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी ये संस्था, जानिए क्यों

असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को अपडेट करने की मांग को लेकर उच्चतम न्यायालय में जनहित याचिका दाखिल करने वाले गैर सरकारी संगठन असम पब्लिक वक्र्स (एपीडब्ल्यू) ने शनिवार को जारी एनआरसी की अंतिम सूची को ‘त्रुटिपूर्ण’ बताते हुए कहा कि वह इस सूची के पुन:सत्यापन के लिए एक बार फिर शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटायेगा। एपीडब्ल्यू के अध्यक्ष अभिजीत शर्मा ने कहा, अवैध घुसपैठियों के रक्षकों को बधाइयां क्योंकि वे आज उन्हें देश और असम का वैध नागरिक बनाने में कामयाब हो गये। 



खर्च के ऑडिट की मांग

उन्होंने कहा कि उनका संगठन एनआरसी की अंतिम सूची के पुन:सत्यापन और पूरी प्रक्रिया पर हुए खर्च के ऑडिट की मांग को लेकर दोबारा उच्चतम न्यायालय जायेगा। शर्मा ने कहा, इस पूरी प्रक्रिया में 1600 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं, जिसका ऑडिट होना चाहिए। एनआरसी अपडेट करने के लिए सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराने वाली सॉफ्टवेयर क्षेत्र की प्रमुख कंपनी विप्रो ने भी इस सूची के ‘त्रुटिपूर्ण’ होने के लिए जिम्मेदार है। राज्य के विभिन्न जिलों में कंपनी की ओर से नियुक्त डाटा एंटी ऑपरेटर अवैध आव्रजकों के नाम सूची में शामिल करने में संलिप्त रहे हैं। 



ट्रिब्यूनल्स के काम पर जाहिर की चिंता

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया ने एनआरसी सूची में छूटे लोगों को विदेशी न्यायाधिकरण (फॉरेन ट्रिब्यूनल्स) में अपील करने का अधिकार प्रदान किये जाने के बाद 100 से अधिक ट्रिब्यूनल्स के काम करने को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया ने असम सरकार से यह सुनिश्चित करने की अपील की है कि ये ट्रिब्यूनल्स पूरी पारदर्शिता और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत निष्पक्ष सुनवाई के मानकों के अनुरूप काम करें। 



असम गण परिषद भी निराश

वहीं राज्य की भाजपा नीत सरकार के सहयोगी दल असम गण परिषद (एजीपी) ने एनआरसी की अंतिम सूची से केवल 19 लाख लोगों का नाम शामिल नहीं किये जाने पर निराशा जताते हुए कहा कि राज्य में अवैध आव्रजकों की भारी मौजूदगी के मद्देनजर यह संख्या बहुत कम है। एजीपी के अध्यक्ष एवं राज्य के कैबिनेट मंत्री अतुल बोरा ने यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा, बहुत कम लोगों को एनआरसी सूची से बाहर रखा गया है, 19 लाख का आंकड़ा बहुत कम है। हम इन आंकड़ों से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के पूर्व मुख्यंमंत्री तरुण गोगोई ने विधानसभा में कहा था कि राज्य में 30 लाख अवैध आव्रजक हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री इंद्रजीत गुप्ता ने यह संख्या 50 लाख और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने 40 लाख बतायी थी। उन्होंने कहा कि इससे साफ है कि अवैध आव्रजकों की संख्या लाखों में है और एनआरसी की अंतिम सूची से महज 19 लाख लोगों के नाम बाहर रखने से स्थानीय लोगों को भारी निराशा हुई है। 




कांग्रेस ने जताई आशंका

इस बीच कांग्रेस ने एनआरसी की अंतिम सूची में बड़ी संख्या में भारतीयों के नाम शामिल नहीं होने की आशंका जताते हुए कहा कि पार्टी के पास कई परिस्थितिजन्य साक्ष्य हैं जिनसे यह पता चलता है कि जिन 19 लाख लोगों के नाम सूची में नहीं है, उनमें से कई भारतीय नागरिक हैं तथा उन्हें भाषा और धर्म के आधार पर सूची से बाहर कर दिया गया है। उसने कहा कि कईं ऐसे मामले भी सामने आये हैं जिनमें एक ही परिवार के कुछ सदस्यों को सूची में शामिल किया गया और कुछ के नामों को बाहर रखा गया।