बस 15 दिन बाद बड़ी मुश्किल में फंस जाएंगे लाखों लोग, सुप्रीम कोर्ट से मोदी सरकार को लगा ऐसा तगड़ा झटका

Daily news network Posted: 2019-08-13 11:56:47 IST Updated: 2019-08-16 11:22:58 IST
बस 15 दिन बाद बड़ी मुश्किल में फंस जाएंगे लाखों लोग, सुप्रीम कोर्ट से मोदी सरकार को लगा ऐसा तगड़ा झटका

असम एनआरसी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आदेश दिया कि सूची से बाहर रखे गए लोगों के नाम 31 अगस्त को ऑनलाइन प्रकाशित किए जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आधार की तरह ही एनआरसी के आंकड़ों को सुरक्षित रखने के लिए उचित व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि पूरी एनआरसी प्रक्रिया को केवल कुछ कानूनी चुनौतियां खड़ी किए जाने की वजह से दोहराने का आदेश नहीं दिया जा सकता। 



गुवाहाटी हाईकोर्ट में कर सकेंगे अपील

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर कोई भी अभिभावकों में से कोई एक संदेहास्पद वोटर है, या विदेशी घोषित किया गया है, या केस लड़ रहा है, उसका बच्चा 3 दिसंबर 2004 को पैदा हुआ है, तो वह एनआरसी के दायरे से बाहर होगा।  अवैध प्रवासियों की सुनवाई जिस ट्रिब्यूनल में चलेगी, उसके खिलाफ अपील गुवाहाटी हाईकोर्ट में की जा सकेगी। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) की आखिरी सूची जारी करने की तारीख बढ़ा दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने एनआरसी की सूची जारी करने की तारीख अब 31 अगस्त कर दी है। पहले ये डेडलाइन 31 जुलाई तक थी।

 

 


पिछले साल जारी हुआ था फाइनल ड्राफ्ट

सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला एनआरसी कॉर्डिनेटर की उस अपील के बाद आया था, जिसमें उन्होंने मांग की थी कि नयी सूची व्यापक और सही हो इसके लिए जरूरी है कि इसमें सभी वैध व्यक्तियों के नाम जोड़े जाएं और अवैध व्यक्तियों के नाम हटाए जाए, इसके लिए और समय की जरूरत है। आपको बता दें कि असम में एनआरसी का फाइनल ड्राफ्ट गत 30 जुलाई 2018 को जारी हुआ था, इसमें करीब 40 लाख लोग बाहर रह गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया था कि दावा पेश करते समय व्यक्ति दस दस्तावेजों में से किसी एक या उससे ज्यादा को आधार बना सकता है, बाकी के पांच दस्तावेजों को आधार बनाए जाने पर कोर्ट ने संयोजक हजेला से 15 दिन में उनका नजरिया मांगा। सरकार की ओर से अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने सभी 15 दस्तावेजों को आधार बनाने की इजाजत मांगते हुए कहा था कि असम के ज्यादातर लोग गांव में रहने वाले और कम पढ़े लिखे हैं, जो छूट गए हैं उन्हें अपना दावा करने के लिए मौका मिलना चाहिए।