NRC ने दिया बड़ा झटका, स्वतंत्रता सेनानी के बेटे को बताया विदेशी

Daily news network Posted: 2019-07-11 18:17:52 IST Updated: 2019-07-11 18:17:52 IST
NRC ने दिया बड़ा झटका, स्वतंत्रता सेनानी के बेटे को बताया विदेशी

पूर्वोत्तर राज्य असम में नेशनल रजिस्ट्रल ऑफ सिटीजन यानी एनआरसी अपडेशन का काम अब अंतिम चरण में चल रहा है। हालांकि जब एनआरसी असम में लागू हुआ है, तभी से इसे लेकर कई विवाद सामने आ रहे हैं। कई स्थानीय लोगों का आरोप हैं कि वे लंबे समय से राज्य में रह रहे हैं, इसके बावजूद भी उन्हें विदेशी घोषित कर दिया गया। ऐसा ही कुछ असम के प्रदीप बोरदोलोई के साथ हुआ है। 




बता दें कि असम के मोरीगांव जिले के चरायबाही इलाके में रहने वाले प्रदीप बोरदोलोई के पिता एक स्वतंत्रता सेनानी थे और उन्होंने खुद ने साल 1979 से लेकर 1985 तक चले असम आंदोलन में हिस्सा लिया था, लेकिन अब उनका नाम ही एनआरसी की लिस्ट से गायब है। 62 वर्षीय बोरदोलोई का कहना है कि उन्होंने अपनी जिन्दगी असम आंदोलन को समर्पित कर दी थी। मैं इसके चलते जिला जेल में भी एक हफ्ते तक बंद रहा। हम फेयर एनआरसी के लिए लड़े, लेकिन यह दुखद है कि अब मुझे ही इसकी वजह से परेशानी उठानी पड़ रही है। बोरदोलोई के साथ ही उनकी पत्नी पिंकूमोनी (46 वर्ष) और दो बच्चों के नाम भी एनआरसी लिस्ट से गायब हैं।

 



प्रदीप बोरदोलोई ने बताया कि जब वह एनआरसी सेवा केन्द्र गए तो उन्हें बताया गया कि उनके दस्तावेज सही हैं और उन्हें घबराने की कोई जरुरत नहीं है। लेकिन 30 जुलाई, 2018 को जारी हुई एनआरसी की लिस्ट में बोरदोलोई परिवार का नाम नहीं है। प्रदीप का कहना है कि उसके बाद से ही वह एनआरसी सेवा केन्द्रों के चक्कर लगा रहे हैं। जहां अधिकारियों द्वारा उन्हें बताया जा रहा है कि उनके दस्तावेज सही हैं और उनकी समस्या दूर हो जाएगी।




बोरदोलोई को शक है कि उन्होंने साइबर कैफे से ऑनलाइन एनआरसी के लिए अप्लाई किया था, ऐसे में हो सकता है कि वहीं से कुछ गड़बड़ हुई है। बोरदोलोई के अनुसार, सभी चाहते हैं कि एनआरसी निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीके से लागू हो, लेकिन जिस दिशा में चीजें जा रही हैं, उन्हें देखकर लगता है कि इसमें भारी लापरवाही बरती जा रही है। बता दें कि बीते साल 30 जुलाई को एनआरसी की पहली लिस्ट जारी की गई थी। जिसमें 40 लाख लोगों को एनआरसी में जगह नहीं मिली थी। उसके बाद बीते जून में इस लिस्ट में से एक लाख से भी ज्यादा नामों को ड्रॉप कर दिया गया था। इस तरह राज्य में करीब 42 लाख लोगों के नाम अब एनआरसी की लिस्ट से बाहर हैं। ऐसे में सभी की निगाहें 31 जुलाई को जारी होने वाली एनआरसी की फाइनल लिस्ट पर लगी हैं।