असम के मुसलमान खौफ में, पढि़ए मरजीना बीबी की कहानी

Daily news network Posted: 2018-01-06 17:44:10 IST Updated: 2018-07-04 16:24:32 IST
असम के मुसलमान खौफ में, पढि़ए मरजीना बीबी की कहानी
  • असम में अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए बहुप्रतीक्षित नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस (एनआरसी) का पहला ड्राफ्ट जारी किया गया है।

गुवाहाटी।

असम में अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए बहुप्रतीक्षित नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस (एनआरसी) का पहला ड्राफ्ट जारी किया गया है। इसमें राज्य के 1 करोड़ 90 लाख लोगों के नाम है जबकि नागरिक रजिस्टर में शामिल होने के लिए आवेदन करने वालों की कुल संख्या 3 करोड़ 29 लाख है। इन सभी ने विभिन्न दस्तावेज दिए हैं जिससे उनका नाम भारतीय नागरिकों के रजिस्टर में आ सके। जब से एनआरसी का पहला ड्राफ्ट सामने आया है तब से राज्य का मुस्लिम समुदाय खौफ में है। अधिकतर मुस्लिमों की शिकायत है कि सूची में उनका नाम नहीं है। आपको बता दें कि असम की कुल आबादी में से एक तिहाई मुस्लिम हैं।


 बताया जा रहा है कि एनआरसी का आखिरी ड्राफ्ट इस साल जुलाई में जारी की जाएगी। फोफोंगा गांव में रहने वाली 26 वर्षीय मरजीना बीबी का नाम नागरिक रजिस्टर में शामिल नहीं है। मरजीना को डर है कि कहीं प्रशासन उनसे यह ना कह दे कि वह भारतीय नागरिक नहीं है। मरजीना अपना मतदाता पहचान पत्र दिखाकर बताती है कि उन्होंने साल 2016 में राज्य में हुए विधानसभा चुनावों में वोट दिया था लेकिन प्रशासन उन्हें बांग्लादेशी मानता है। मरजीना को समझ में नहीं आ रहा है कि उनके साथ ऐसा क्यों हो रहा है। मरजीना के मुताबिक मेरे माता पिता का जन्म यहीं हुआ, मेरा जन्म यहीं हुआ और मैं भारतीय हूं।


 मरजीना ने कहा कि वह मुस्लिम है इसलिए उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। मरजीना ने बताया कि आठ महीने पहले उन्होंने जेल में सिर्फ इसलिए काटे क्योंकि उन पर अवैध रूप से रहने वाले बाग्लादेशी आप्रवासी होने का आरोप था। जब उन्होंने अपने कागज दिखाए तो उन्हें छोड़ दिया गया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक फाफोंग में एनआरसी की पहली सूची में सिर्फ 4500 मुस्लिमों को ही जगह मिली है जबकि इलाके से 11 हजार लोगों ने इसके लिए आवेदन किया था।


 प्रक्रिया में शामिल सरकारी अधिकारी गौतम शर्मा का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में मुसलमानों के साथ कोई भेदभाव नहीं हो रहा है। बकौल शर्मा, कोई भेदभाव करना असंभव है। हम दस्तावेज देखते हैं, फिर प्रक्रिया शुरू करते हैं। ये सब आवेदकों की ओर से जमा किए गए कागजों पर

   निर्भर करता है। पूरी प्रक्रिया में समय लगता है।