असम के वकीलों की धमकी, मोदी सरकार के बिल को सुप्रीम कोर्ट में देंगे चुनौती

Daily news network Posted: 2019-01-12 13:31:32 IST Updated: 2019-01-13 08:39:15 IST

गुवाहाटी।

असम के वकीलों ने नागरिकता (संशोधन) बिल 2019 के विरोध में धरना प्रदर्शन किया। उन्होंने धमकी दी है कि अगर यह कानून बना तो वे सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। वकीलों ने ऑल असम लॉयर्स सोसिएशन (एएएलए) के बैनर तले विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि विधेयक असंवैधानिक है।

 


 लॉयर्स असोसिएशन गुवाहाटी (एलएजी) के अध्यक्ष बिराज कुमार चौधरी ने कहा कि अगर बिल को लागू किया तो वे इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे क्योंकि बिल संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन करता है।

 एलएजी के दस्यों ने कामरुप(मेट्रो) के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की कोर्ट के परिसर में 11 बजे से दोपहर1 बजे तक प्रदर्शन किया। एएएलए के कार्यकारी सदस्य चौधरी ने कहा कि बिल 1985 के असम समझौते का उल्लंघन करता है और एनआरसी अपडेट को निरर्थक कर देता है।

 

 

 


उन्होंने कहा कि नागरिकता कानून 1955 में धारा 6(ए) को बतौर संशोधन शामिल किया गया है। असम समझौते में कहा गया है कि 24 मार्च 1971 की मध्यरात्रि तक जो अवैध प्रवासी बांग्लादेश से असम आए उन्हें नागरिकता दी जाएगी। शेष राष्ट्र के लिए कट ऑफ डेट 19 जुलाई 1948 है। चौधरी ने कहा कि असम पर पहले से ही अवैध प्रवासियों का बोझ है जो 24 मार्च 1971 तक यहां आए, अब और अवैध प्रवासियों को अकोमोडेट के लिए कोई जस्टिफिकेशन नहीं हो सकता। चौधरी ने बताया कि  राज्य के मूल निवासियों के संघ एएसएम ने धारा 6(ए) को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

 

 


 मामला फिलहाल न्यायालय के विचाराधीन है। जब इस तरह का महत्वपूर्ण मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हो तब केन्द्र सरकार की संविधान(संशोधन)बिल को संसद में पारित करने की पहल गलत है। गुवाहाटी हाईकोर्ट की बार असोसिएशन के सदस्यों ने हाईकोर्ट परिसर में प्रदर्शन किया। उन्होंने कामरुप(मेट्रो) के डिप्टी कमिश्नर के दफ्तर तक रैली निकाली। उन्होंने डिप्टी कमिश्नर को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के नाम ज्ञापन दिया। इसमें बिल को निरस्त करने की मांग की गई है। तिनसुकिया, गोलाघाट और डिब्रूगढ़ की लॉयर्स असोसिएशन ने बिल के  खिलाफ रैलियां निकाली।